29/12/19

ईसाई गाने | अनुभव वीडियो "सारी दुनिया तेरी रोशनी की पनाह में आती"



  ईसाई गाने | अनुभव वीडियो "सारी दुनिया तेरी रोशनी की पनाह में आती"



(सारी दुनिया की रोशनी)
दर्द-ओ-ग़म से कराहती इंसानियत को तेरे आग़ोश में आकर दुलार मिलता है, तेरी झूलती-सी मज़बूत, फैली बाहें, तेरी चमकती, मुस्कुराती-सी निगाहें! तेरे प्यार और करुणा में बंधे हम, तेरा दमकता-उभरता चेहरा, नज़र आता है सदियों से बिगड़ी दुनिया में अब, तेरी रोशनी की, किरण नज़र, आने लगी है, बुराई और पतन से तिल-तिल मरती दुनिया अपने मुक्तिदाता को फिर से बुलाने लगी है।

28/12/19

प्रभु की वाणी "परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार" (भाग दो)



प्रभु की वाणी "परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार" (भाग दो)


 यह इस बात का प्रमाण थी कि परमेश्वर का आत्मा पूरी तरह से देह में साकार हुआ है, कि परमेश्वर के देहधारण के युग में उसका देह पवित्रात्मा का समस्त कार्य करेगा। सामान्य मानवता वाला मसीह ऐसा देह है जिसमें सामान्य मानवता, सामान्य विवेक, और मानविक विचार को धारण करते हुए, आत्मा साकार होता है। "साकार होना" का अर्थ है परमेश्वर का मानव बनना, पवित्रात्मा का देह बनना; इसे स्पष्ट रूप से कहें, तो यह तब होता है जब परमेश्वर स्वयं सामान्य मानवता वाली देह में वास करता है, और इसके माध्यम से अपने दिव्य कार्य को व्यक्त करता है—यही है साकार होने या देहधारी होने का अर्थ।

27/12/19

परमेश्वर के वचन "परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार" (भाग एक)



परमेश्वर के वचन "परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार" (भाग एक)


इससे पहले कि यीशु अपना कार्य करता, वह अपनी सामान्य मानवता में जीया। कोई नहीं कह सकता था कि वह परमेश्वर है, किसी को भी पता नहीं चला कि वह देहधारी परमेश्वर है; लोग उसे केवल एक पूर्णतः साधारण व्यक्ति समझते थे। उसकी सर्वथा सामान्य, साधारण मानवता इस बात का प्रमाण थी कि परमेश्वर ने देह में देहधारण किया है, और यह कि अनुग्रह का युग देहधारी परमेश्वर के कार्य का युग है, न कि पवित्रात्मा के कार्य का युग।

26/12/19

परमेश्वर के वचन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम" (भाग एक)



परमेश्वर के वचन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम" (भाग एक)


वह कार्य जो मनुष्य के दिमाग में होता है उसे बहुत ही आसानी से मनुष्य के द्वारा प्राप्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, इस धार्मिक संसार में पास्टर एवं अगुवे अपने कार्य को करने के लिए अपने वरदानों एवं पदों पर भरोसा रखते हैं। ऐसे लोग जो लोग लम्बे समय से उनका अनुसरण करते हैं वे उनके वरदानों के द्वारा संक्रमित हो जाएंगे और जो वे हैं उनमें से कुछ के द्वारा उन्हें प्रभावित किया जाएगा। वे लोगों के वरदानों, योग्यताओं एवं ज्ञान पर ध्यान केन्द्रित करते हैं, और वे कुछ अलौकिक कार्यों और अनेक गम्भीर अवास्तविक सिद्धान्तों पर ध्यान देते हैं (हाँ वास्तव में, इन गम्भीर सिद्धान्तों को हासिल नहीं किया जा सकता है)।

25/12/19

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार" (भाग दो)



परमेश्वर के वचन के पाठ "परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार" (भाग दो)


पवित्र आत्मा का कार्य कुल मिलाकर लोगों को इस योग्य बनाना है कि वे लाभ प्राप्त कर सकें; यह कुल मिलाकर लोगों की उन्नति के विषय में है; ऐसा कोई कार्य नहीं है जो लोगों को लाभान्वित न करता हो। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि सत्य गहरा है या उथला, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उन लोगों की क्षमता किसके समान है जो सत्य को स्वीकार करते हैं, जो कुछ भी पवित्र आत्मा करता है, यह सब लोगों के लिए लाभदायक है।

24/12/19

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार" (भाग एक)



परमेश्वर के वचन के पाठ "परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार" (भाग एक)


मनुष्य के काम में कितना कार्य पवित्र आत्मा का कार्य है और कितना मनुष्य का अनुभव है? यहाँ तक कि अब भी, ऐसा कहा जा सकता है कि लोग अब तक इन प्रश्नों को नहीं समझते हैं, यह सब इसलिए है क्योंकि लोग पवित्र आत्मा के कार्य करने के सिद्धान्तों को नहीं समझते हैं।

23/12/19

परमेश्वर के कथन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है" (भाग तीन)


परमेश्वर के कथन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है" (भाग तीन)


परमेश्वर देहधारी इसलिए बना क्योंकि उसके कार्य का लक्ष्य शैतान की आत्मा, या कोई अभौतिक चीज़ नहीं, बल्कि मनुष्य है, जो माँस से बना है और जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया है। ऐसा निश्चित रूप से मनुष्य की देह को भ्रष्ट कर देने की वजह से है कि परमेश्वर ने हाड़-माँस के मनुष्य को अपने कार्य का लक्ष्य बनाया है; इसके अतिरिक्त, क्योंकि मनुष्य भ्रष्टता का लक्ष्य है, इसलिए उसने उद्धार के अपने कार्य के समस्त चरणों के दौरान मनुष्य को अपने कार्य का एकमात्र लक्ष्य बनाया है। मनुष्य एक नश्वर प्राणी है, और वह हाड़-माँस तथा लहू से बना है, और एकमात्र परमेश्वर ही है जो मनुष्य को बचा सकता है।

22/12/19

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है" (भाग दो)



सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है" (भाग दो)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "मनुष्य को शैतान के द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया है, और वह परमेश्वर के सभी जीवधारियों में सबसे ऊपर है, अतः मनुष्य को परमेश्वर के उद्धार की आवश्यकता है। परमेश्वर के उद्धार का विषय मनुष्य है, न कि शैतान, और जिसे बचाया जाना चाहिए वह मनुष्य की देह है, एवं मनुष्य का प्राण है, और शैतान नहीं है। शैतान परमेश्वर के सम्पूर्ण विनाश का विषय है, मनुष्य परमेश्वर के उद्धार का विषय है, और मनुष्य के शरीर को शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया जा चुका है, अतः जिसे पहले बचाना है वह मनुष्य का शरीर ही होगा।

21/12/19

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है" (भाग एक)


 सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है" (भाग एक)



सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "परमेश्वर ने देहधारण किया क्योंकि शैतान का आत्मा, या कोई अभौतिक चीज़ उसके कार्य का विषय नहीं है, परन्तु मनुष्य है, जो शरीर से बना है और जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया गया है। निश्चित रूप से चूँकि मनुष्य की देह को भ्रष्ट किया गया है इसलिए परमेश्वर ने हाड़-मांस के मनुष्य को अपने कार्य का विषय बनाया है; इसके अतिरिक्त, क्योंकि मनुष्य भ्रष्टता का विषय है, उसने मनुष्य को अपने उद्धार के कार्य के समस्त चरणों के दौरान अपने कार्य का एकमात्र विषय बनाया है।

20/12/19

Hindi Christian Dance Video | परमेश्वर अंतिम दिनों में मुख्यत वचन से काम करते हैं


Hindi Christian Dance Video | परमेश्वर अंतिम दिनों में मुख्यत वचन से काम करते हैं


अंतिम दिनों में परमेश्वर देह बन जाते हैं। वो सब पूरा करते हैं अधिकतर अपने वचन से। वो सबकुछ प्रत्यक्ष करते हैं अपने वचन से। केवल उसके वचन में तुम देख सकते हो, वो जो हैं और ये कि वो परमेश्वर हैं। देहधारी परमेश्वर आते हैं धरती पर कहने अपना वचन केवल, ना किसी और काम से। न देते हैं कोई संकेत, परमेश्वर, क्योंकि है उनका वचन काफ़ी।

19/12/19

Hindi Christian Song Download | देहधारी परमेश्वर मानव जाति को नये युग में ले जाते हैं



Hindi Christian Song Download | देहधारी परमेश्वर मानव जाति को नये युग में ले जाते हैं


देह-धारी प्रभु करते हैं अंत उस युग का, जहां मानवजाति ने कभी न देखा यहोवा का चेहरा। करते हैं प्रभु अंत उस युग का, जहां मानव का अज्ञात प्रभु में रहा विश्वास। अंतिम देहधारी प्रभु का काम रहा लाना मानव को ज़्यादा सच्चे, व्यावहारिक, और सुहाने युग में।

17/12/19

परमेश्वर के भजन | पूरी धरती ख़ुश होकर परमेश्वर की स्तुति करती है (Lyrics)

परमेश्वर के भजन | पूरी धरती ख़ुश होकर परमेश्वर की स्तुति करती है (Lyrics)

"एकमात्र सच्चा परमेश्वर जो करता है प्रशासित
ब्रह्मांड की सभी चीज़ों को" —सर्वशक्तिमान मसीह! है यही साक्ष्य पवित्र आत्मा का। हर जगह गवाही देने के लिए वह काम कर रहा है, तो किसी को नहीं होगा संदेह। विजयी महाराज, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, संसार पर विद्यमान हो गया है। वह पाप को जीत चुका है और छुटकारा दिलाने वाला कार्य पूरा कर चुका है। ब्रह्मांड के विजयी महाराज की करो प्रशंसा। "पूरी पृथ्वी आनंदित होगी! सर्वशक्तिमान परमेश्वर, प्रशंसा के है योग्य!" शौर्य और शक्ति तुम्हारी है, ब्रह्मांड के महान महाराज! ब्रह्मांड के महान महाराज!

16/12/19

प्रभु की वाणी | "क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो?" (Hindi)



प्रभु की वाणी | "क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो?" (Hindi)

जब आप सामान्य मनुष्यत्व से बाहर निकलकर जीवन व्यतीत करना प्राप्त कर लेते हैं, और पूर्ण कर दिए गए हैं, तो हालांकि आप भविष्यवाणी करने, या कोई रहस्य बताने में असमर्थ होंगे, आप एक मनुष्य के स्वरूप को प्रगट करेंगे और जीवन व्यतीत करेंगे। परमेश्वर ने मनुष्य की रचना की, जिसके बाद मनुष्य शैतान द्वारा भ्रष्ट किया गया, और इस भ्रष्टाचार ने मनुष्यों को "मृत देह" बना दिया और परिणामस्वरूप आपके बदलने के बाद, आप इन मृत देहों से भिन्न हो जाएंगे।

15/12/19

Hindi Gospel Video | "चीनी सुसमाचार गायक-मण्डली 19वाँ प्रदर्शन" (Hindi)



Hindi Gospel Video | "चीनी सुसमाचार गायक-मण्डली 19वाँ प्रदर्शन" (Hindi)


तारों भरी, निस्तब्ध और शांत रात्रि के आकाश तले, ईसाईयों का एक समूह उत्सुकता से उद्धारकर्ता की वापसी की प्रतीक्षा करते हुए और सुखद संगीत की धुन में गाता और नाचता है। जब वे खुशी का समाचार सुनते हैं कि "परमेश्वर वापस आ गया है" और "परमेश्वर ने नए वचन कहे हैं", वे आश्चर्यचकित और उत्साहित हो जाते हैं। वे सोचते हैं: "परमेश्वर वापस आ गया है? वह पहले ही प्रकट हो चुका है?" जिज्ञासा और अनिश्चितता के साथ, एक के बाद एक, वे परमेश्वर के नए वचनों को खोजने की यात्रा में कदम रखते हैं। अपनी कर्मठ खोज में, कुछ लोग सवाल कर रहे हैं जबकि अन्य इसे सादगी से स्वीकार करते हैं। कुछ लोग टीका-टिप्पणी के बिना देखते हैं, जबकि अन्य लोग सुझाव देते हैं और बाइबल में उत्तर ढूँढ़ते हैं - वे देखते हैं लेकिन अंत में यह व्यर्थ है ...। जब वे निराश हो जाते हैं, ठीक तभी एक गवाह उनके लिए राज्य का युग बाइबल की एक प्रति लाता है, और वे पुस्तक में दिए गए वचनों से गहराई तक आकर्षित हो जाते हैं। यह किस प्रकार की पुस्तक है? क्या उन्होंने वास्तव में उन नए वचनों को पाया है जो परमेश्वर ने उस पुस्तक में कहे हैं? क्या उन्होंने परमेश्वर के प्रकटन का स्वागत किया है?

14/12/19

प्रभु की वाणी "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश I)


प्रभु की वाणी "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" (अंश I)

तुम में से प्रत्येक व्यक्ति को परमेश्वर में विश्वास करने के जीवन को नए सिरे से जाँचकर यह देखना चाहिए कि परमेश्वर का अनुसरण करने की प्रक्रिया में, तुम परमेश्‍वर को सही अर्थों में समझ पाए हो, सही मायनों में उसे बूझ पाए हो, और वाकई में उसे जान पाए हो या नहीं, क्या तुम वाकई जानते हो कि, विभिन्न

13/12/19

ईसाई गीत | सत्य को स्वीकारने वाले ही परमेश्वर की वाणी सुन सकते हैं


ईसाई गीत | सत्य को स्वीकारने वाले ही परमेश्वर की वाणी सुन सकते हैं

जहाँ परमेश्वर का प्रकटन है, वहाँ सत्य की अभिव्यक्ति है, परमेश्वर की वाणी है। वही सुन सकते हैं परमेश्वर की वाणी, वही देख सकते हैं प्रकटन परमेश्वर का, सत्य को जो करते हैं स्वीकार। नामुमकिन जैसे विचार कर दो दरकिनार। नामुमकिन जैसे विचारों का मुमकिन होना सम्भव है। स्वर्ग से ऊँची है परमेश्वर की बुद्धि की उड़ान।aa उसके ख़्याल और काम बहुत परे हैं, इंसान के सारे ख़्यालों से।

12/12/19

मसीही गीत | परमेश्वर खोज रहा है उन्हें जो हैं प्यासे उसके प्रकटन के लिए (Lyrics)


मसीही गीत | परमेश्वर खोज रहा है उन्हें जो हैं प्यासे उसके प्रकटन के लिए (Lyrics)

जहाँ परमेश्वर का प्रकटन है,
वहाँ सत्य की अभिव्यक्ति है, परमेश्वर की वाणी है।
वही सुन सकते हैं परमेश्वर की वाणी,
वही देख सकते हैं प्रकटन परमेश्वर का, सत्य को जो करते हैं स्वीकार।
नामुमकिन जैसे विचार कर दो दरकिनार।
नामुमकिन जैसे विचारों का मुमकिन होना सम्भव है।
स्वर्ग से ऊँची है परमेश्वर की बुद्धि की उड़ान।
उसके ख़्याल और काम बहुत परे हैं, इंसान के सारे ख़्यालों से।
कोई चीज़ होती है नामुमकिन जितनी,
होता उतना ही ज़्यादा सत्य वहाँ खोज के लिये।
होता जितना परे इंसान की संकल्पना से,
होता है उतना ही समावेश परमेश्वर के सत्य का उसमें।
प्रकट कहीं भी हो वो, परमेश्वर फिर भी परमेश्वर है।
कहाँ हुआ वो प्रकट, उसका सार नहीं बदलता इससे।

11/12/19

मसीही गीत | ख़ामोशी से आता है हमारे मध्य परमेश्वर |




मसीही गीत | ख़ामोशी से आता है हमारे मध्य परमेश्वर |


मौन है परमेश्वर, सामने हमारे कभी प्रकट हुआ नहीं,फिर भी कार्य उसका कभी रुका नहीं। नज़र रखता है पूरी धरती पर, नियंत्रित करता है हर चीज़ को। देखता है इंसान के सभी शब्दों को और काम को। उसकी योजना के मुताबिक पूरा होता है धीरे-धीरे उसका प्रबंधन। ख़ामोश, मगर बढ़ते हैं इंसान के करीब उसके कदम। न्याय-पीठ उसकी तैनात होती है कायनात में, उसके बाद होता है अवरोहण उसके सिंहासन का हमारे मध्य में, उसके सिंहासन का हमारे मध्य में।

9/12/19

भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है

परमेश्वर देहधारी इसलिए बना क्योंकि उसके कार्य का लक्ष्य शैतान की आत्मा, या कोई अभौतिक चीज़ नहीं, बल्कि मनुष्य है, जो माँस से बना है और जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया है। ऐसा निश्चित रूप से मनुष्य की देह को भ्रष्ट कर देने की वजह से है कि परमेश्वर ने हाड़-माँस के मनुष्य को अपने कार्य का लक्ष्य बनाया है; इसके अतिरिक्त, क्योंकि मनुष्य भ्रष्टता का लक्ष्य है, इसलिए उसने उद्धार के अपने कार्य के समस्त चरणों के दौरान मनुष्य को अपने कार्य का एकमात्र लक्ष्य बनाया है।

8/12/19

परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप सेवा कैसे करें

आज, मैं मुख्य रूप से इस पर संवाद करूंगा कि लोगों को परमेश्वर पर अपने विश्वास में परमेश्वर की सेवा कैसे करनी चाहिए, किन शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए, परमेश्वर की सेवा करने वालों को कौन से सत्य समझने चाहिए, और तुम लोगों की सेवा में कौन-कौन से भटकाव हैं। तुम लोगों को यह सब कुछ समझना चाहिए। ये मुद्दे इस बात की चर्चा करते हैं कि तुम लोग परमेश्वर पर किस प्रकार विश्वास करते हो, तुम लोग पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन के मार्ग पर किस प्रकार चलते हो, और कैसे तुम हर चीज़ में परमेश्वर के आयोजनों को समर्पित होते हो, और इससे तुम लोग परमेश्वर के कार्य के हर कदम को जानने में सक्षम होगे। जब तुम लोग उस स्थिति पर पहुँचोगे, तब तुम लोग समझोगे कि परमेश्वर में विश्वास करना क्या होता है, किस प्रकार उचित तरीके से परमेश्वर पर विश्वास करें, और परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप कार्य करने के लिए तुम लोगों को क्या करना चाहिए। यह तुम लोगों को परमेश्वर के कार्य के प्रति पूर्णतः और सर्वथा आज्ञाकारी बना देगा, और तुम लोगों के पास कोई शिकायतें नहीं होंगी, तुम लोग आलोचना या विश्लेषण नहीं करोगे, और अनुसंधान तो बिलकुल नहीं करोगे।

7/12/19

सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे

मैं अपने कार्य को अन्य जाति देशों में फैला रहा हूँ। मेरी महिमा पूरे ब्रह्मांड में जगमगा रही है; मेरी इच्छा सितारों की तरह अंकित लोगों में सन्निहित है, सबकी कमान मेरे हाथों में है और सब मेरे द्वारा सौंपे गए कार्य को करने में लगे हैं। इस समय से, मैं सभी मनुष्यों को दूसरी दुनिया लाते हुए एक नये युग में प्रवेश कर गया हूँ।

4/12/19

मसीही भजन | परमेश्वर के कार्य फैले हैं ब्रह्मांड के विशाल विस्तार में




मसीही भजन | परमेश्वर के कार्य फैले हैं ब्रह्मांड के विशाल विस्तार में

परमेश्वर देखता है सब कुछ ऊपर से, सभी चीज़ों पर है प्रभुत्व उसका ऊपर से। साथ ही, पृथ्वी पर भेजा है अपना उद्धार परमेश्वर ने। हर समय परमेश्वर देख रहा है अपने गुप्त स्थान से, इंसान की हर चाल को, हर चीज़ को जो वे कहते और करते हैं। खुली हुई किताब की तरह परमेश्वर जानता है इंसान को।

2/12/19

मसीही गीत | पूरब की ओर लाया है परमेश्वर अपनी महिमा | Bible Prophecy Has Come True




मसीही गीत | ख़ामोशी से आता है हमारे मध्य परमेश्वर |

मौन है परमेश्वर, सामने हमारे कभी प्रकट हुआ नहीं, फिर भी कार्य उसका कभी रुका नहीं। नज़र रखता है पूरी धरती पर, नियंत्रित करता है हर चीज़ को। देखता है इंसान के सभी शब्दों को और काम को। उसकी योजना के मुताबिक पूरा होता है धीरे-धीरे उसका प्रबंधन। ख़ामोश, मगर बढ़ते हैं इंसान के करीब उसके कदम। न्याय-पीठ उसकी तैनात होती है कायनात में, उसके बाद होता है अवरोहण उसके सिंहासन का हमारे मध्य में, उसके सिंहासन का हमारे मध्य में। कैसा शानदार, भव्य और गंभीर नज़ारा है। कपोत और सिंह के मानिंद, आत्मा का आगमन होता है। सचमुच बुद्धिमान है, धार्मिक है, प्रतापी है वो। अधिकार सहित, प्रेम और करुणा से भरपूर है वो। उसकी योजना के मुताबिक पूरा होता है धीरे-धीरे उसका प्रबंधन। ख़ामोश, मगर बढ़ते हैं इंसान के करीब उसके कदम, उसके कदम। न्याय-पीठ उसकी तैनात होती है कायनात में, उसके बाद होता है अवरोहण उसके सिंहासन का हमारे मध्य में, उसके बाद होता है अवरोहण उसके सिंहासन का हमारे मध्य में। "मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

प्रभु की वाणी, इसे कैसे पहचाना जाए, अद्धिक जानने के लिए अभी पढ़े़ें, आप प्रभु के साथ पुनर्मिलन कपाएंगे।

मसीही भजन प्रदान करते हैं विभिन्न शैली के स्तुति गीत! हमारे लिए परमेश्‍वर के प्रेम और उद्धार का अनुभव करने के लिए नि:शुल्‍क ऑनलाइन देखिए और स्‍ट्रीम कीजिए।


मसीही गीत

1/12/19

विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए

वो क्या है जो मनुष्य ने प्राप्त किया है जब उसने सर्वप्रथम परमेश्वर में विश्वास किया? तुमने परमेश्वर के बारे में क्या जाना है? परमेश्वर में अपने विश्वास के कारण तुम कितने बदले हो? अब तुम सभी जानते हो कि परमेश्वर में मनुष्य का विश्वास आत्मा की मुक्ति और देह के कल्याण के लिए ही नही है, और न ही यह उसके जीवन को परमेश्वर के लिए जो प्रेम है उससे सम्पन्न बनाने के लिए, इत्यादि है।

मसीही गीत | भरपूर स्तुति करते उसकी सभी परमेश्वर-जन

  

मसीही गीत | भरपूर स्तुति करते उसकी सभी परमेश्वर-जन



आरोहित किये गये हैं परमेश्वर के सामने हम।
शामिल होकर शानदार भोज में, आनंदित हैं हम।
लेते आनंद परमेश्वर के वचनों का, समझते हैं सत्य को हम, मुक्त हैं आत्माएँ हमारी, महसूस करते आज़ाद हम। आभार और स्तुति से भरे हैं दिल हमारे। गाने से ख़ुद को नहीं रोक पाते हम। अपने दिल की ख़ुशी को, व्यक्त नहीं कर पाते हम। स्तुति करो और कूदो ख़ुशी के लिये।

26/11/19

प्रश्न 36: धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों की धार्मिक संसार में सत्ता बनी हुई है और ज्यादातर लोग उनका पालन और अनुसरण करते हैं—यह एक सच्चाई है। तुम कहते हो कि धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग इस बात को स्वीकार नहीं करते हैं कि परमेश्वर ने देहधारण किया है, कि वे देहधारी परमेश्वर द्वारा प्रकट सत्य पर विश्वास नहीं करते और वे फरीसियों के मार्ग पर चल रहे हैं, और हम इस बात से सहमत हैं। लेकिन तुम यह क्यों कहते हो कि सारे धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग पाखंडी फरीसी हैं, कि वे सभी मसीह-विरोधी हैं जो अंतिम दिनों में देहधारी परमेश्वर के कार्य से उघाड़ दिए गए हैं, और वे अंत में विनाश में डूब जाएँगे? हम इस समय इस बात को स्वीकार नहीं कर सकते। तुम अपना यह दावा कि इन लोगों को नहीं बचाया जा सकता है और उन सभी को विनाश में डूबना चाहिए, किस बात पर आधारित करते हो, इस पर कृपया सहभागिता करो।

उत्तर:
धार्मिक मंडलों के लोग परमेश्वर की अवहेलना कैसे करते हैं, इसका सार केवल देहधारी मसीह के आगमन के बाद ही प्रकट और विश्लेषित किया जा सकता है। कोई भी भ्रष्ट मनुष्य धार्मिक मंडलों द्वारा परमेश्वर की अवहेलना की सच्चाई और उसके सार को नहीं जान सकता है, क्योंकि भ्रष्ट मनुष्यों में कोई सत्य नहीं होता है। वे तो केवल झूठे चरवाहों और मसीह-विरोधी राक्षसों द्वारा नियंत्रित, भ्रमित किये जा सकते हैं, चालाकी से काम में लाये जा सकते हैं, ताकि बुराई करने में शामिल किये जायें और परमेश्वर की अवहेलना करने में शैतान के दास और साथी बनें।

24/11/19

प्रश्न 35: धार्मिक दुनिया के अधिकांश लोग मानते हैं कि पादरियों और प्राचीन लोगों को परमेश्वर के द्वारा चुना और प्रतिष्ठित किया गया है, और यह कि वे सभी धार्मिक कलीसियाओं में परमेश्वर की सेवा करते हैं; अगर हम पादरियों और प्राचीन लोगों का अनुसरण और आज्ञा-पालन करते हैं, तो हम वास्तव में परमेश्वर का ही अनुसरण और आज्ञा-पालन करते हैं। यथार्थतः मनुष्य का अनुसरण और आज्ञा-पालन करने का क्या मतलब है, और वास्तव में परमेश्वर का अनुसरण और आज्ञा-पालन करने का क्या अर्थ है, ज्यादातर लोग सत्य के इस पहलू को नहीं समझते हैं, तो कृपया हमारे लिए यह सहभागिता करो।

उत्तर:
धर्म में, कुछ लोग सोचते हैं कि सभी धार्मिक पादरी और एल्डर्स प्रभु द्वारा चुने और प्रतिष्ठित किये जाते है। इसलिए लोगों को उनका आज्ञापालन करना चाहिए। क्या इस तरह की धारणा का बाइबल में कोई आधार है? क्या प्रभु के वचन में इसका कोई प्रमाण है? क्या इसमें पवित्र आत्मा की गवाही और पवित्र आत्मा के कार्य की स्वीकृति है? अगर सारे जवाब "नहीं" हैं, तो क्या बहुमत का यह विश्वास कि सभी पादरी और एल्डर्स प्रभु द्वारा चुने और प्रतिष्ठित किए जाते हैं, लोगों की अवधारणाओं और कल्पनाओं से नहीं आया है? आइए इस बारे में विचार करें।

21/11/19

धरती पर सच्चा प्यार पाना क्यों है इतना मुश्किल



  • परमेश्वर के भजन - धरती पर सच्चा प्यार पाना क्यों है इतना मुश्किल
  •  I
  • कब से है मुझे तुम्हें देखने की लालसा, परमेश्वर।
  • मैं रहना नहीं चाहता अब तुमसे दूर।
  • तुम हो मेरे संप्रभु सृष्टिकर्ता,
  • लेकिन अब रह सकते हैं हम हमेशा एक साथ नहीं।

19/11/19

मैं इतना कुछ पाता हूँ परमेश्वर की ताड़ना और न्याय से



  • परमेश्वर के भजन - मैं इतना कुछ पाता हूँ परमेश्वर की ताड़ना और न्याय से
  •  I
  • जब परमेश्वर करुणा से पेश आते हो,
  • तो मुझे दिलासा और ख़ुशी मिलती है।
  • मेरा आनंद और दिलासा दुगने हो जाते हैं,
  • जब तुम ताड़ना देते हो मुझे।

15/11/19

प्रश्न 34: धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों को बाइबल का सशक्त ज्ञान है, वे प्रायः लोगों के समक्ष बाइबल का विस्तार करते हैं और उन्हें बाइबल का सहारा बनाये रखने के लिए कहते हैं, इसलिए बाइबल की व्याख्या करना और उसकी प्रशंसा करना क्या वास्तव में परमेश्वर की गवाही देना और प्रशंसा करना है? ऐसा क्यों कहा जाता है कि धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग ढोंगी फरीसी हैं? हम अभी भी इसको समझ नहीं सकते हैं, तो क्या तुम हमारे लिए इसका जवाब दे सकते हो?

उत्तर:
लोगों के लिए, बाइबल की व्याख्या करना गलत नहीं होना चाहिए, परंतु बाइबल की व्याख्या करते वक्त वे वास्तव में ऐसे काम करते हैं जिनसे परमेश्वर का विरोध होता है। ये किस तरह के लोग हैं? क्या वे पाखंडी फरीसी नहीं हैं? क्या वे परमेश्वर काविरोध करने वाले मसीह-विरोधी नहीं हैं? पादरियों और एल्डरों का बाइबल की व्याख्या करना परमेश्वर का विरोध करना क्यों है?

13/11/19

प्रश्न 33: उस समय, जब प्रभु यीशु अपने कार्य को करने के लिए आया था, यहूदी फरीसियों ने उसका अंधाधुंध विरोध किया, उसकी निंदा की और उसे क्रूस पर कीलों से जड़ दिया। जब अंतिम दिनों का सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपना कार्य करने के लिए आता है, तो धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग उसकी भी अवहेलना और निंदा करते हैं, परमेश्वर को फिर एक बार क्रूस पर चढ़ाते हैं। यहूदी फरीसी, धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग इस तरह सत्य से नफरत क्यों करते हैं और क्यों इस तरह मसीह के विरुद्ध खुद को खड़ा कर देते हैं? वास्तव में उनका निहित सार क्या है?

 उत्तर:
प्रभु में विश्वास करने वाला हर व्यक्ति जानता है कि फरीसियों ने प्रभु यीशु का विरोध किया। लेकिन उनके विरोध की जड़ और उसका असल सार क्या था? आप कह सकते हैं कि धर्म के 2,000 वर्षों के इतिहास में, कोई भी इस प्रश्न का उत्तर नहीं ढूंढ पाया है। हालाँकि प्रभु यीशु के फरीसियों को शाप देने के बारे में नये विधान में उल्लेख है, लेकिन कोई भी फरीसियों के सार को समझ नहीं पाया है।

8/11/19

प्रश्न 32: फरीसियों ने अक्सर धार्मिक और करुणाशील रूप धारण कर सभाओं में लोगों से बाइबल की व्याख्या की, और वे जाहिर तौर पर कुछ भी गैरकानूनी करते हुए दिखाई नहीं देते थे। तो क्यों प्रभु यीशु ने फरीसियों को शाप दिया था? उनका ढोंग कैसे प्रकट हुआ था? ऐसा क्यों कहा जाता है कि धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग ढोंगी फरीसियों के मार्ग पर ही चलते हैं?

उत्तर:
जो लोग प्रभु में विश्वास रखते हैं जानते हैं कि प्रभु यीशु वास्तव में फरीसियों से घृणा करते थे और उन्होंने उनको शाप दिया था और उन पर सात संताप घोषित किये थे। यह प्रभु के विश्वासियों को पाखंडी फरीसियों को समझने, उनके चंगुल और नियंत्रण से दूर होने और परमेश्वर द्वारा दिए उद्धार को प्राप्त करने देने में बहुत सार्थक है। वैसे, यह शर्मनाक बात है कि कई विश्वासी फरीसियों के पाखंड के सार को नहीं समझ सकते हैं।

7/11/19

प्रश्न 31: तुम इस बात की गवाही देते हो कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर जिन वचनों को "वचन देह में प्रकट होता है" में व्यक्त करता है, वे स्वयं परमेश्वर के ही वचन हैं, लेकिन हम मानते हैं कि वे किसी ऐसे व्यक्ति के शब्द हैं जो पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्ध हुआ है। इसलिए, जिसकी मुझे खोज करनी है वह यह है कि देहधारी परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए वचनों और पवित्र आत्मा के द्वारा प्रबुद्ध किये गये व्यक्ति के शब्दों के बीच यथार्थतः क्या अंतर है?

उत्तर:
सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर जो भी व्‍यक्‍त करते हैं, वह सत्‍य है, तथा वचन देह में प्रकट होता है, वस्‍तुत: सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर, जो प्रभु यीशु का दूसरा आगमन हैं, उनके कथन हैं। सभी हृदयवान व आत्मा-युक्त जन, उनके वचनों को देख कर, इस बात को हार्दिक रूप से स्‍वीकारेंगे, यह पहचान जाएँगे कि वह परमेश्‍वर की वाणी है एवं परमेश्‍वर के सामने नतमस्‍तक हो जाएँगे। तब भी, ऐसे कुछ लोग हैं जो यह विश्‍वास करते हैं कि अंत के दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर द्वारा व्‍यक्‍त किए गए वचन पवित्रात्‍मा से प्रेरित एक मनुष्‍य द्वारा लिखे गये वचन मात्र हैं, और वे यह नहीं मानते कि ये परमेश्‍वर के वास्‍तविक वचन हैं।

3/11/19

जीवन की गवाही



  • ईसाई गीत - जीवन की गवाही
  •  I
  • परमेश्वर की गवाही देने के कारण
  • मुझे ले लिया जाएगा हिरासत में एक दिन।
  • अपने दिल में मुझे है पता यह पीड़ा है
  • धार्मिकता के लिए।

2/11/19

यहाँ का आसमान है कितना नीला




  •  परमेश्वर के भजन - यहाँ का आसमान है कितना नीला
  •  I
  • यहाँ है एक आसमां, कितना अलग है ये आसमां!
  • खूबसूरत महक से भीगी है ये धरा,
  • और कितनी साफ़ है ये हवा।

31/10/19

प्रश्न 30: तुम यह गवाही देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में लौट चुका है, वह उस संपूर्ण सत्य को अभिव्यक्त करता है जो मानवता को शुद्ध बनाता और उसे बचाता है और वह परमेश्वर के परिवार से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को करता है, तो हमें परमेश्वर की आवाज़ को कैसे पहचाननी चाहिए और हमें कैसे इस बात की पुष्टि करनी चाहिए कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर वास्तव में लौटा हुआ प्रभु यीशु ही है?

उत्तर:
यह प्रश्न सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकारने और परमेश्वर के प्रकटन को देखने के लिए, हमें यह जानना होगा कि परमेश्वर की आवाज की पहचान कैसे की जाए। वास्तव में, परमेश्वर की आवाज पहचानने का अर्थ है परमेश्वर के वचनों और कथनों को पहचानना, और सृष्टिकर्ता के वचनों की विशेषताओं को पहचानना। चाहे वे देहधारी परमेश्वर के वचन हों, या परमात्मा के कथन हों, वे सभी ऊपर आकाश से परमेश्वर द्वारा मानवजाति को कहे गए वचन हैं।

30/10/19

प्रश्न 29: दो हजार वर्षों से, परमेश्वर में मनुष्य का विश्वास बाइबल पर आधारित रहा है, और प्रभु यीशु के आगमन ने बाइबल के पुराने नियम को नकारा नहीं है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने जब अंतिम दिनों में न्याय के अपने कार्य को कर लिया होगा, तो हर कोई जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार करता है, वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को खाने और पीने पर ध्यान केन्द्रित करेगा और शायद ही कभी बाइबल को पढ़ेगा। मुझे जिसकी जानकारी लेनी है वह यह है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंतिम दिनों के कार्य को स्वीकार करने के बाद, बाइबल के प्रति सही दृष्टिकोण क्या है, और इसका इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? किसी व्यक्ति के लिए परमेश्वर पर विश्वास करने का आधार क्या होना चाहिए, ताकि वह परमेश्वर पर विश्वास करने के मार्ग पर चल सके और परमेश्वर के उद्धार को हासिल कर सके?

उत्तर:
बाइबल परमेश्वर के कार्य के पहले दो चरणों का वास्तविक आलेख है। दूसरे शब्दों में, यह परमेश्वर के कार्य के उन पहले दो चरणों की गवाही है, जिसमें स्वर्ग, पृथ्वी तथा मानव सहित सभी चीज़ों की रचना के बाद इंसान के मार्गदर्शन और उद्धार को निश्चित किया गया है। बाइबल को पढ़ने से, हर कोई यह समझ सकता है कि व्यवस्था के युग में किस तरह परमेश्वर ने मनुष्य का नेतृत्व किया और उन्हें उसके सामने जीवन जीना और उसकी आराधना करना सिखाया।

27/10/19

प्रश्न 28: बाइबल परमेश्वर के कार्य का प्रमाण है; केवल बाइबल पढ़ने के द्वारा ही प्रभु पर विश्वास करने वाले लोग यह जान सकते हैं कि परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी और सभी चीजों को बनाया और इसी से वे परमेश्वर के अद्भुत कार्यों, उसकी महानता और सर्वशक्तिमानता को देख सकते हैं। बाइबल में परमेश्वर के बहुत सारे वचन और मनुष्य के अनुभवों की बहुत सारी गवाहियाँ हैं; यह मनुष्य के जीवन के लिए प्रावधान कर सकती है और मनुष्य के लिए बहुत लाभदायक हो सकती है, इसलिए मुझे जिसकी खोज करनी है वह यह है कि क्या हम वास्तव में बाइबल पढ़ने के द्वारा अनन्त जीवन को प्राप्त कर सकते हैं? क्या बाइबल के भीतर वास्तव में अनन्त जीवन का कोई मार्ग नहीं है?

उत्तर:
बाइबल पढ़ने से हम यह समझ पाए कि परमेश्‍वर सभी चीजों का सृष्टिकर्ता है और हमने उसके चमत्कारिक कर्मों को पहचानना शुरू कर दिया। इसका कारण यह है कि बाइबल परमेश्वर के कार्य के प्रथम दो चरणों की गवाही है। यह परमेश्‍वर के वचनों और कार्य का अभिलेख है और व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग के दौरान मनुष्य की गवाही है। इसलिए, हमारे विश्वास के लिए बाइबल बहुत महत्वपूर्ण है इसके बारे में सोचो, यदि बाइबल नहीं होती, तो मनुष्य कैसे परमेश्‍वर और परमेश्‍वर के वचनों को समझ पाता?

25/10/19

प्रश्न 27: बाइबल ईसाई धर्म का अधिनियम है और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, उन्होंने दो हजार वर्षों से बाइबल के अनुसार ऐसा विश्वास किया हैं। इसके अलावा, धार्मिक दुनिया में अधिकांश लोग मानते हैं कि बाइबल प्रभु का प्रतिनिधित्व करती है, कि प्रभु में विश्वास बाइबल में विश्वास है, और बाइबल में विश्वास प्रभु में विश्वास है, और यदि कोई बाइबल से भटक जाता है तो उसे विश्वासी नहीं कहा जा सकता। क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इस तरीके से प्रभु पर विश्वास करना प्रभु की इच्छा के अनुरूप है या नहीं?

उत्तर:
बहुत से लोगों का विश्वास है कि बाइबल प्रभु की प्रतिनिधि है, परमेश्वर की प्रतिनिधि है और प्रभु में विश्वास करने का अर्थ बाइबल में विश्वास करना है, और बाइबल में विश्वास करना प्रभु में विश्वास करने के समान है। वे बाइबल को परमेश्वर के समान दर्जा देते हैं। ऐसे भी लोग हैं जो परमेश्वर को नहीं मानते पर बाइबल को मानते हैं। वे बाइबल को सर्वोच्च मानते हैं और परमेश्वर के स्थान पर बाइबल को रखने का प्रयास भी करते हैं। ऐसे धार्मिक नेता भी हैं जो मसीह को नहीं मानते पर बाइबल को मानते हैं, और दावा करते हैं कि प्रभु के दूसरे अवतरण का उपदेश देने वाले लोग पाखंडी और विधर्मी हैं।

23/10/19

परमेश्वर के हृदय से बेहतर नहीं है दिल कोई



  •  
  • परमेश्वर के भजन - परमेश्वर के हृदय से बेहतर नहीं है दिल कोई
  •  I
  • मैंने परमेश्वर को प्रेम करना चुना है,
  • उनके न्याय और शुद्धिकरण को मुझे स्वीकारना है।
  • ज़रा से दर्द के बावजूद, मुझमें परमेश्वर के प्रेम का गहन ज़ायका है।
  • भ्रष्ट स्वभाव के साथ, न्याय और ताड़ना के लायक है इंसान।

21/10/19

हार्दिक लगाव का गीत



  •  मसीही भजन - हार्दिक लगाव का गीत
  •  
  • I
  • एक है देहधारी परमेश्वर।
  • जो भी वो कहता, जो भी वो करता, सब सत्य है।
  • उसकी धार्मिकता और बुद्धि से प्रेम है मुझे।
  • उसे देखना, उसकी बात मानना, एक आशीष है।

19/10/19

प्रश्न 26: धार्मिक पादरी और प्राचीन लोग बाइबल में पौलुस के इन शब्दों को थामे रहते हैं: "सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्‍वर की प्रेरणा से रचा गया है" (2 तीमुथियुस 3:16), वे ऐसा विश्वास करते हैं कि बाइबल की हर बात परमेश्वर का ही वचन है, लेकिन तुम कहते हो कि बाइबल के शब्द पूरी तरह से परमेश्वर के वचन नहीं हैं, तो यह सब क्या है?

उत्तर:
सबसे पहले, हमें यह समझने की ज़रूरत है कि बाइबल कैसे और कब बनी। बाइबल की मूल किताब पुराने नियम का उल्लेख करती है। इज़राइली लोगों ने, अर्थात यहूदियों ने, केवल पुराने नियम को ही पवित्र शास्त्र कहा था। और फिर, अनुग्रह के युग में, प्रभु यीशु ने छुटकारे के कार्य का एक चरण पूरा किया।

18/10/19

प्रश्न 25: तुम यह गवाही देते हो कि प्रभु यीशु पहले से ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस आ चुका है, कि वह पूरी सत्य को अभिव्यक्त करता है जिससे कि लोग शुद्धिकरण प्राप्त कर सकें और बचाए जा सकें, और वर्तमान में वह परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को कर रहा है, लेकिन हम इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं करते। यह इसलिए है क्योंकि धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का हमें बहुधा यह निर्देश है कि परमेश्वर के सभी वचन और कार्य बाइबल में अभिलेखित हैं और बाइबल के बाहर परमेश्वर का कोई और वचन या कार्य नहीं हो सकता है, और बाइबल के विरुद्ध या उससे परे जाने वाली हर बात विधर्म है। हम इस समस्या को समझ नहीं सकते हैं, तो तुम कृपया इसे हमें समझा दो।

उत्तर:
धार्मिक समुदाय का इस प्रकार का दृष्टिकोण परमेश्वर के वचन पर आधारित नहीं है; यह पूरी तरह से बाइबल की गलत व्याख्या का परिणाम है। बाइबल परमेश्वर के कार्य के पहले दो चरणों की गवाही देती है; यह सच है। हालांकि, बाइबल में जो आलेखित है, वह सीमित है, और इसमें परमेश्वर द्वारा अपने कार्य के दो चरणों में कहे गए सारे वचन और इस कार्य की सारी गवाहियाँ शामिल नहीं हैं।

14/10/19

शुद्ध हो चुके हैं जो वही विश्राम में प्रवेश करेंगे



  • मसीही भजन - शुद्ध हो चुके हैं जो वही विश्राम में प्रवेश करेंगे
  • Ⅰ
  • आदम और हव्वा की आने वाली संतानें
  • नहीं रहेंगी अब शैतान के अधीन,
  • बल्कि ये बचाई गई,
  • शुद्ध की गई मानवजाति होगी।

13/10/19

प्रश्न 24: तुम यह प्रमाण देते हो कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर देहधारी परमेश्वर है, जो अभी अंतिम दिनों में अपने न्याय के कार्य को कर रहा है। लेकिन धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का कहना है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कार्य वास्तव में मनुष्य का काम है, और बहुत से लोग जो प्रभु यीशु पर विश्वास नहीं करते, वे कहते हैं कि ईसाई धर्म एक मनुष्य में विश्वास है। हम अभी भी यह नहीं समझ पाए हैं कि परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के बीच में क्या अंतर है, इसलिए कृपया हमारे लिए यह सहभागिता करो।

उत्तर:
परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य निश्चित रूप से अलग हैं। अगर हम सावधानी से जाँच करें तो हम लोग इसे देख पाएँगे। मिसाल के तौर पर, अगर हम प्रभु यीशु के कथनों और कार्य को देखें और फिर प्रेरितों के कथनों और कार्य पर नज़र डालें, तो हम कह सकते हैं कि अंतर एकदम स्पष्ट है। प्रभु यीशु द्वारा कहा गया हर वचन सत्य है और उसमें अधिकार है, और बहुत से रहस्यों को प्रकट कर सकता है। ये सभी ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें मनुष्यजाति कभी नहीं कर सकती है।

10/10/19

प्रश्न 23: प्रभु यीशु ने कहा: "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा; वरन् जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)। अधिकांश लोग सोचते हैं कि प्रभु यीशु ने हमें पहले से ही अनन्त जीवन का मार्ग प्रदान किया है, लेकिन मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के इन वचनों को पढ़ा है: "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है।" यह सब क्या है? यह क्यों कहता है कि आखिरी दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है?

उत्तर:
अनन्‍त जीवन का मार्ग वास्‍तविकता में क्‍या है, इस विषय में हमें पहले यह जानना होगा कि वह आता कहाँ से है। हम सभी जानते हैं कि जब परमेश्‍वर देहधारी हुए, तो उन्‍होंने गवाही दी कि वे ही सत्‍य हैं, मार्ग हैं, और जीवन हैं। यह इस बात का पर्याप्‍त प्रमाण है कि केवल मसीह ही अनन्‍त जीवन का मार्ग व्‍यक्‍त कर सकते हैं। चूँकि मसीह देहधारी परमेश्‍वर के प्रकटन हैं, चूँकि वे देहरूपी वस्‍त्र धारण किए हुए परमेश्‍वर के आत्‍मा हैं, इसका अर्थ यह हुआ कि मसीह का सार परमेश्‍वर का सार है, और यह कि स्‍वयं मसीह ही सत्‍य हैं, मार्ग हैं, और जीवन हैं।

9/10/19

प्रश्न 22: प्रभु यीशु को क्रूस पर मनुष्यों के लिए पाप-बलि के रूप में कीलों से जड़ दिया गया था, जिससे हमें पाप से बचा लिया गया। अगर हम प्रभु यीशु से भटकते हैं और सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, तो क्या यह प्रभु यीशु के प्रति विश्वासघात नहीं होगा? क्या यह धर्मत्याग नहीं होगा?

उत्तर:
अंत के दिनों में अब, जब परमेश्वर ने नया कार्य किया और एक नया नाम ग्रहण किया है, तो यीशु के नाम को छोड़ कर और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम को अपना कर हम परमेश्वर से धोखा कर रहे हैं या परमेश्वर के कार्य के साथ तालमेल बना रहे हैं? जब परमेश्वर नए कार्य की शुरुआत करते हैं, तो मनुष्य को केवल परमेश्वर के कार्य के साथ तालमेल रखकर बचाया जा सकता है। यह सच है। हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन से देख सकते हैं, कि परमेश्वर का "सर्वशक्तिमान परमेश्वर" नाम को अपनाना, अंत के दिनों में किए गए उनके कार्यों और व्यक्त किए गए स्वभाव से संबंधित था।

5/10/19

प्रश्न 21: बाइबल में यह लिखा गया है: "यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक–सा है" (इब्रानियों 13:8)। तो परमेश्वर का नाम कभी नहीं बदलता है! लेकिन तुम कहते हो कि जब परमेश्वर अंतिम दिनों में फिर से आएगा तो वह एक नया नाम लेगा और उसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहा जाएगा। तुम इसे कैसे समझा सकते हो?

 उत्तर:
बाइबल में कहा गया है, "यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक–सा है" (इब्रानियों 13:8)। इससे इस सच्‍चाई का पता चलता है कि ईश्‍वर का स्‍वभाव और उसका मूल सार शाश्‍वत है और यह बदलता नहीं है। इसका मतलब यह नहीं होता कि उसका नाम नहीं बदलेगा। चलिए, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों पर नजर डालते हैं।

4/10/19

परमेश्वर के महान कार्य के पूरा होने की सराहना करो



  • मसीही भजन - परमेश्वर के महान कार्य के पूरा होने की सराहना करो
  • Ⅰ
  • वचन का प्रयोग करता है मसीह
  • इंसान के न्याय के लिये अंत के दिनों में,
  • हो चुका है राज्य के युग का आरंभ।
  • हो रही है हर चीज़ नई अब
  • परमेश्वर के वचनों से।

30/9/19

परमेश्वर को पसंद हैं लोग जिनमें संकल्प है



  • परमेश्वर के भजन - परमेश्वर को पसंद हैं लोग जिनमें संकल्प है
  • Ⅰ
  • परिवेश, मुश्किलें हमारी कितनी भी कठोर क्यों न हों,
  • हम कितने भी मायूस क्यों न हों,
  • हम में एक संकल्प होना चाहिये।
  • हम खो नहीं सकते भरोसा,
  • कि आयेगा बदलाव हमारे पुराने स्वभाव में।

ईसाई गाने | अनुभव वीडियो "सारी दुनिया तेरी रोशनी की पनाह में आती"

  ईसाई गाने | अनुभव वीडियो "सारी दुनिया तेरी रोशनी की पनाह में आती" (सारी दुनिया की रोशनी) दर्द-ओ-ग़म से कराहती इ...