19/11/19

मैं इतना कुछ पाता हूँ परमेश्वर की ताड़ना और न्याय से



  • परमेश्वर के भजन - मैं इतना कुछ पाता हूँ परमेश्वर की ताड़ना और न्याय से
  •  I
  • जब परमेश्वर करुणा से पेश आते हो,
  • तो मुझे दिलासा और ख़ुशी मिलती है।
  • मेरा आनंद और दिलासा दुगने हो जाते हैं,
  • जब तुम ताड़ना देते हो मुझे।
  • हालाँकि मैं दुर्बल हूँ, अनकहे दर्द सहता हूँ,
  • हालाँकि मैं दुखी हूँ, आँसुओं में डूबा हूँ,
  • तुम तो जानते हो मेरी व्यथा
  • मेरी कमज़ोरी, नाफ़रमानी से आती है परमेश्वर।
  • ना कर पाता हूँ पूरी इच्छा ना अनुरोध मैं तुम्हारा,
  • मुझे दुख और अफ़सोस होता है।
  • मगर मैं तुम्हारी ख़ुशी और इस मकाम तक
  • पहुँचने के लिये, सब-कुछ करूँगा परमेश्वर।
  • तुम्हारी ताड़ना की सुरक्षा में हूँ मैं।
  • सर्वोत्तम उद्धार है ये जो पाया मैंने।
  • तुम्हारा न्याय पार कर जाता है तुम्हारी सहनशक्ति को।
  • तुम्हारी दया का आनंद उठाने में मदद मिलती है मुझे इससे।
  • II
  • आज देखता हूँ मैं प्रेम तुम्हारा
  • स्वर्ग से भी बढ़कर है, सबसे बेहतर है।
  • महज़ दया नहीं है प्रेम तुम्हारा,
  • ताड़ना और न्याय है प्रेम तुम्हारा।
  • बहुत कुछ मिला है इनसे मुझे।
  • हो नहीं सकता इनके बिना निर्मल कोई,
  • कर नहीं सकता सृष्टिकर्ता के प्रेम की अनुभूति कोई।


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