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27/12/19

परमेश्वर के वचन "परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार" (भाग एक)



परमेश्वर के वचन "परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार" (भाग एक)


इससे पहले कि यीशु अपना कार्य करता, वह अपनी सामान्य मानवता में जीया। कोई नहीं कह सकता था कि वह परमेश्वर है, किसी को भी पता नहीं चला कि वह देहधारी परमेश्वर है; लोग उसे केवल एक पूर्णतः साधारण व्यक्ति समझते थे। उसकी सर्वथा सामान्य, साधारण मानवता इस बात का प्रमाण थी कि परमेश्वर ने देह में देहधारण किया है, और यह कि अनुग्रह का युग देहधारी परमेश्वर के कार्य का युग है, न कि पवित्रात्मा के कार्य का युग।

28/8/19

प्रश्न 9: यह स्पष्ट रूप से बाइबल में लिखा है कि प्रभु यीशु मसीह है, परमेश्वर का पुत्र है, और वे सभी लोग जो प्रभु में विश्वास करते हैं, वे भी मानते हैं कि प्रभु यीशु मसीह है और वह परमेश्वर का पुत्र है। और फिर भी तुम यह गवाही दे रहे हो कि देहधारी मसीह परमेश्वर का प्रकटन है, कि वह खुद परमेश्वर है। तुम कृपया हमें यह बताओगे कि क्या देहधारी मसीह वास्तव में परमेश्वर का पुत्र है, या स्वयं परमेश्वर है?

 उत्तर:

क्या देहधारी मसीह स्वयं परमेश्वर हैं या परमेश्वर के पुत्र हैं? यह है ठीक वही सवाल है जिसे ज्यादातर विश्वासियों को समझने में परेशानी होती है। जब देहधारी प्रभु यीशु मानवजाति के छुटकारे का कार्य करने के लिए आये थे, तो लोगों के बीच प्रकट होकर कार्य करते हुए, परमेश्वर मनुष्य के पुत्र बन गए। उन्होंने न केवल अनुग्रह के युग का आरंभ किया, बल्कि एक नए युग की भी शुरुआत की जिसमें परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से मनुष्यों के बीच रहने के लिए मनुष्यों की दुनिया में आये। पूरी श्रद्धा के साथ, मनुष्य ने प्रभु यीशु को मसीह यानी परमेश्वर का पुत्र कहा। उस समय, पवित्र आत्मा ने भी इस तथ्य की गवाही दी कि प्रभु यीशु परमेश्वर के प्रिय पुत्र हैं, और प्रभु यीशु स्‍वर्ग के परमेश्‍वर को पिता कहते थे।

22/8/19

प्रश्न 6: परमेश्वर यीशु देहधारी परमेश्वर था और कोई भी इस से इन्कार नहीं कर सकता। अब तुम यह गवाही दे रहे हो कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही देह में लौटा हुआ प्रभु यीशु है, परन्तु धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का कहना है कि तुम जिसमें विश्वास करते हो वह सिर्फ एक व्यक्ति है, वे कहते हैं कि तुम लोगों को धोखा दिया गया है, और हम इसका भेद समझ नहीं पाते हैं। उस समय जब प्रभु यीशु देह बना और छुटकारे का कार्य करने के लिए आया, यहूदी फरीसियों ने भी कहा कि प्रभु यीशु केवल एक व्यक्ति था, कि जो कोई भी उस पर विश्वास करता था, वह धोखा खा रहा था। इसलिए, हम देह-धारण के बारे में सच्चाई के इस पहलू का अनुसरण करना चाहते हैं। वास्तव में देह-धारण क्या होता है? और देह-धारण का सार क्या है? कृपया हमारे लिए इस बारे में सहभागिता करो।

 उत्तर:

परमेश्वर के देह धारण के रूप में प्रभु यीशु में आप लोगों का विश्वास झूठा नहीं है। लेकिन आप लोग प्रभु यीशु में विश्वास क्यों करते हैं? क्या आप लोगों को सचमुच लगता है कि प्रभु यीशु परमेश्वर हैं? आप लोग बाइबल में दर्ज़ बातों के कारण और पवित्र आत्मा के कार्य के कारण प्रभु यीशु में विश्वास करते हैं। लेकिन इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आप लोग क्या कहते हैं, अगर आप लोगों ने प्रभु यीशु को आमने-सामने नहीं देखा है, तो क्या आप सचमुच यह कहने की हिम्मत करते हैं कि आप लोग प्रभु यीशु को जानते हैं?

19/6/19

2. अंतिम दिनों में चीन में कार्य करने के लिए परमेश्वर के देह-धारण का उद्देश्य और महत्व क्या है?

परमेश्वर का देहधारण,वचन देह में प्रकट होता है
2. अंतिम दिनों में चीन में कार्य करने के लिए परमेश्वर के देह-धारण का उद्देश्य और महत्व क्या है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर के कार्य का प्रत्येक चरण सारी मानवजाति के वास्ते है, और समूची मानवजाति की ओर निर्देशित है। यद्यपि यह देह में उसका कार्य है, फिर भी इसे अब भी सारी मानवजाति की ओर निर्देशित किया गया है; वह सारी मानवजाति का परमेश्वर है, वह सभी सृजे गए और न सृजे गए प्राणियों का परमेश्वर है। यद्यपि देह में उसका कार्य एक सीमित दायरे के भीतर होता है, और इस कार्य का विषय भी सीमित होता है, फिर भी हर बार जब वह अपना कार्य करने के लिए देह धारण करता है तो वह अपने कार्य का एक विषय चुनता है जो अत्यंत प्रतिनिधिक है; वह सामान्य एवं मामूली लोगों के एक समूह को नहीं चुनता है कि उन पर कार्य करे, किन्तु इसके बजाए अपने कार्य के विषय के रूप में लोगों के ऐसे समूह को चुनता है जो देह में उसके कार्य के प्रतिनिधि होने में सक्षम हैं।

18/6/19

1. अंतिम दिनों में परमेश्वर ने चीन में देह-धारण किया है; बाइबल की भविष्यवाणियों में और परमेश्वर के वचनों में इसके लिए क्या आधार मिलता है?

बाइबल
1. अंतिम दिनों में परमेश्वर ने चीन में देह-धारण किया है; बाइबल की भविष्यवाणियों में और परमेश्वर के वचनों में इसके लिए क्या आधार मिलता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक जाति-जाति में मेरा नाम महान् है, और हर कहीं मेरे नाम पर धूप और शुद्ध भेंट चढ़ाई जाती है" (मलाकी 1:11)।
"क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा" (मत्ती 24:27)।

17/6/19

3. व्यवस्था के युग में नबियों के द्वारा दिए गए परमेश्वर के वचनों और देहधारी परमेश्वर द्वारा व्यक्त परमेश्वर के वचनों में क्या अंतर है?

3. व्यवस्था के युग में नबियों के द्वारा दिए गए परमेश्वर के वचनों और देहधारी परमेश्वर द्वारा व्यक्त परमेश्वर के वचनों में क्या अंतर है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
अनुग्रह के युग में, यीशु ने भी काफ़ी बातचीत की और काफ़ी कार्य किया। वह यशायाह से किस प्रकार भिन्न था? वह दानिय्येल से किस प्रकार भिन्न था? क्या वह कोई भविष्यद्वक्ता था? ऐसा क्यों कहा जाता है कि वह मसीह है? उनके मध्य क्या भिन्नताएँ हैं? वे सभी मनुष्य थे जिन्होंने वचन बोले थे, और मनुष्य को उनके वचन लगभग एक से प्रतीत होते थे। उन सभी ने बातें की और कार्य किए। पुराने विधान के भविष्यवद्क्ताओं ने भविष्यवाणियाँ की, और उसी तरह से, यीशु भी वैसा ही कर सका। ऐसा क्यों है? यहाँ कार्य की प्रकृति के आधार पर भिन्नता है।

28/5/19

1. मसीह के दिव्य तत्व को कोई कैसे जान सकता है?

1. मसीह के दिव्य तत्व को कोई कैसे जान सकता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"यीशु ने उससे कहा, 'मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ' 'ये बातें जो मैं तुम से कहता हूँ, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है। मेरा विश्‍वास करो कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरा विश्‍वास करो'" (यूहन्ना 14:6, 10-11)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
ऐसी बात का अध्ययन करना कठिन नहीं है, परंतु हम में से प्रत्येक के लिए इस सत्य को जानने की अपेक्षा की जाती है: जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर का सार धारण करेगा, और जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर की अभिव्यक्ति धारण करेगा। चूँकि परमेश्वर देहधारी हुआ, वह उस कार्य को प्रकट करेगा जो उसे अवश्य करना चाहिए, और चूँकि परमेश्वर ने देह धारण किया, तो वह उसे अभिव्यक्त करेगा जो वह है, और मनुष्यों के लिए सत्य को लाने के समर्थ होगा, मनुष्यों को जीवन प्रदान करने, और मनुष्य को मार्ग दिखाने में सक्षम होगा। जिस शरीर में परमेश्वर का सार नहीं है, निश्चित रूप से वह देहधारी परमेश्वर नहीं है; इस बारे में कोई संदेह नहीं है। यह पता लगाने के लिए कि क्या यह देहधारी परमेश्वर है, मनुष्य को इसका निर्धारण उसके द्वारा अभिव्यक्त स्वभाव से और उसके द्वारा बोले वचनों से अवश्य करना चाहिए। कहने का अभिप्राय है, कि वह परमेश्वर का देहधारी शरीर है या नहीं, और यह सही मार्ग है या नहीं, इसे परमेश्वर के सार से तय करना चाहिए। और इसलिए, यह निर्धारित करने[क] में कि यह देहधआरी परमेश्वर का शरीर है या नहीं, बाहरी रूप-रंग के बजाय, उसके सार (उसका कार्य, उसके वचन, उसका स्वभाव और बहुत सी अन्य बातें) पर ध्यान देना ही कुंजी है। यदि मनुष्य केवल उसके बाहरी रूप-रंग को ही देखता है, उसके तत्व की अनदेखी करता है, तो यह मनुष्य की अज्ञानता और उसके अनाड़ीपन को दर्शाता है।
"वचन देह में प्रकट होता है" के लिए प्रस्तावना से

25/5/19

3. हर व्यक्ति को देहधारी मसीह और झूठे मसीहों/झूठे भविष्यद्वक्ताओं के बीच रहे अंतर को अवश्य पहचानना चाहिए।


3. हर व्यक्ति को देहधारी मसीह और झूठे मसीहों/झूठे भविष्यद्वक्ताओं के बीच रहे अंतर को अवश्य पहचानना चाहिए।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें" (मत्ती 24:24)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ" (यूहन्ना 14:6)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर का सार धारण करेगा, और जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर की अभिव्यक्ति धारण करेगा। चूँकि परमेश्वर देहधारी हुआ, वह उस कार्य को प्रकट करेगा जो उसे अवश्य करना चाहिए, और चूँकि परमेश्वर ने देह धारण किया, तो वह उसे अभिव्यक्त करेगा जो वह है, और मनुष्यों के लिए सत्य को लाने के समर्थ होगा, मनुष्यों को जीवन प्रदान करने, और मनुष्य को मार्ग दिखाने में सक्षम होगा। जिस शरीर में परमेश्वर का सार नहीं है, निश्चित रूप से वह देहधारी परमेश्वर नहीं है; इस बारे में कोई संदेह नहीं है। यह पता लगाने के लिए कि क्या यह देहधारी परमेश्वर है, मनुष्य को इसका निर्धारण उसके द्वारा अभिव्यक्त स्वभाव से और उसके द्वारा बोले वचनों से अवश्य करना चाहिए। कहने का अभिप्राय है, कि वह परमेश्वर का देहधारी शरीर है या नहीं, और यह सही मार्ग है या नहीं, इसे परमेश्वर के सार से तय करना चाहिए। और इसलिए, यह निर्धारित करने[क] में कि यह देहधआरी परमेश्वर का शरीर है या नहीं, बाहरी रूप-रंग के बजाय, उसके सार (उसका कार्य, उसके वचन, उसका स्वभाव और बहुत सी अन्य बातें) पर ध्यान देना ही कुंजी है। यदि मनुष्य केवल उसके बाहरी रूप-रंग को ही देखता है, उसके तत्व की अनदेखी करता है, तो यह मनुष्य की अज्ञानता और उसके अनाड़ीपन को दर्शाता है।
"वचन देह में प्रकट होता है" के लिए प्रस्तावना से

22/5/19

1. परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के बीच सारभूत अंतर क्या है?

व्यवस्था का युग,अनुग्रह का युग


1. परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के बीच सारभूत अंतर क्या है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
स्वयं परमेश्वर के कार्य में सम्पूर्ण मानवजाति का कार्य सम्मिलित है, और यह सम्पूर्ण युग के कार्य का भी प्रतिनिधित्व करता है। कहने का तात्पर्य है, परमेश्वर का स्वयं का कार्य पवित्र आत्मा के सभी कार्य की गति एवं प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि प्रेरितों का कार्य परमेश्वर के स्वयं के कार्य का अनुसरण करता है और युग की अगुवाई नहीं करता है, न ही यह सम्पूर्ण युग में पवित्र आत्मा के कार्य करने की प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है। वे केवल वही कार्य करते हैं जिसे मनुष्य को अवश्य करना चाहिए, जो प्रबंधकीय कार्य को बिलकुल भी शामिल नहीं करता है। परमेश्वर का स्वयं का कार्य प्रबंधकीय कार्य के भीतर एक परियोजना है। मनुष्य का कार्य केवल उन मनुष्यों का कर्तव्य है जिन्हें उपयोग किया जाता है और इसका प्रबंधकीय कार्य से कोई सम्बन्ध नहीं है। कार्य के विभिन्न पहचान एवं विभिन्न प्रतिनिधित्व के कारण, तथा इस तथ्य के बावजूद कि वे दोनों ही पवित्र आत्मा के कार्य हैं, परमेश्वर के कार्य और मनुष्य के काम के मध्य स्पष्ट एवं ठोस अन्तर हैं।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम" से

26/4/19

10. यह क्यों है कि केवल देह-धारी परमेश्वर के कार्य के अनुभव और आज्ञा-पालन करने के द्वारा ही कोई परमेश्वर को जान सकता है?

प्रार्थना,परमेश्वर को जानना

10. यह क्यों है कि केवल देह-धारी परमेश्वर के कार्य के अनुभव और आज्ञा-पालन करने के द्वारा ही कोई परमेश्वर को जान सकता है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा" (युहन्‍ना 1:14)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता। यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते; और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है" (युहन्‍ना 14:6-7)।
"मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है …" (युहन्‍ना 14:10)।
"मैं और पिता एक हैं" (युहन्‍ना 10:30)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

25/4/19

9. न्याय के कार्य को करने के लिए देह-धारण किया हुआ परमेश्वर किस तरह मानव जाति के अस्पष्ट परमेश्वर में विश्वास को और शैतान के प्रभुत्व के अंधेरे युग को समाप्त करता है?

9. न्याय के कार्य को करने के लिए देह-धारण किया हुआ परमेश्वर किस तरह मानव जाति के अस्पष्ट परमेश्वर में विश्वास को और शैतान के प्रभुत्व के अंधेरे युग को समाप्त करता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि यहोवा के भवन का पर्वत सब पहाड़ों पर दृढ़ किया जाएगा, और सब पहाड़ियों से अधिक ऊँचा किया जाएगा; और हर जाति के लोग धारा के समान उसकी ओर चलेंगे। बहुत से देशों के लोग आएँगे, और आपस में कहेंगे: आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर, याकूब के परमेश्‍वर के भवन में जाएँ; तब वह हमको अपने मार्ग सिखाएगा, और हम उसके पथों पर चलेंगे। क्योंकि यहोवा की व्यवस्था सिय्योन से, और उसका वचन यरूशलेम से निकलेगा। वह जाति जाति का न्याय करेगा, और देश देश के लोगों के झगड़ों को मिटाएगा; और वे अपनी तलवारें पीटकर हल के फाल और अपने भालों को हँसिया बनाएँगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध फिर तलवार न चलाएगी, न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे। हे याकूब के घराने, आ, हम यहोवा के प्रकाश में चलें" (यशायाह 2:2-5)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

23/4/19

7. यह क्यों कहा जाता है कि परमेश्वर का दो बार देहधारी होना देह-धारण की महत्ता को पूरा करता है?

प्रभु यीशु,वचन देह में प्रकट होता है,परमेश्वर का कार्य

7. यह क्यों कहा जाता है कि परमेश्वर का दो बार देहधारी होना देह-धारण की महत्ता को पूरा करता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"वैसे ही मसीह भी बहुतों के पापों को उठा लेने के लिये एक बार बलिदान हुआ; और जो लोग उसकी बाट जोहते हैं उनके उद्धार के लिये दूसरी बार बिना पाप उठाए हुए दिखाई देगा" (इब्रानियों 9:28)।
"आदि में वचन था, और वचन परमेश्‍वर के साथ था, और वचन परमेश्‍वर था" (युहन्ना 1:1)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

22/4/19

6. यह क्यों कहा जाता है कि भ्रष्ट मानव जाति को देह बने परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है?

यीशु,मसीह के कथन,परमेश्वर का कार्य


6. यह क्यों कहा जाता है कि भ्रष्ट मानव जाति को देह बने परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है?
(परमेश्वर के वचन का चुना गया अवतरण)

भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है

21/4/19

5. देह-धारी परमेश्वर और जो परमेश्वर द्वारा उपयोग में लाए जाते हैं उन लोगों के बीच सारभूत अंतर क्या है?

यीशु,परमेश्वर का देहधारण,परमेश्वर का उद्धार
5. देह-धारी परमेश्वर और जो परमेश्वर द्वारा उपयोग में लाए जाते हैं उन लोगों के बीच सारभूत अंतर क्या है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मैं तो पानी से अथवा, में तुम्हें मन फिराव का बपतिस्मा देता हूँ, परन्तु जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्‍तिशाली है; मैं उसकी जूती उठाने के योग्य नहीं। वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा" (मत्ती 3:11)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
तथा मसीह परमेश्वर के आत्मा के द्वारा धारण किया गया देह है। यह देह किसी भी मनुष्य की देह से भिन्न है। यह भिन्नता इसलिए है क्योंकि मसीह मांस तथा खून से बना हुआ नहीं है बल्कि आत्मा का देहधारण है। उसके पास सामान्य मानवता तथा पूर्ण परमेश्वरत्व दोनों हैं। उसकी दिव्यता किसी भी मनुष्य द्वापरमेश्वर का देहधारणरा धारण नहीं की जाती है। उसकी सामान्य मानवता देह में उसकी समस्त सामान्य गतिविधियों को बनाए रखती है, जबकि दिव्यता स्वयं परमेश्वर के कार्य करती है। चाहे यह उसकी मानवता हो या दिव्यता, दोनों स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति समर्पित हैं। मसीह का सार पवित्र आत्मा, अर्थात्, दिव्यता है। इसलिए, उसका सार स्वयं परमेश्वर का है; यह सार उसके स्वयं के कार्य में बाधा उत्पन्न नहीं करेगा, तथा वह संभवतः कोई ऐसा कार्य नहीं कर सकता है जो उसके स्वयं के कार्य को नष्ट करता हो, ना वह ऐसे वचन कहेगा जो उसकी स्वयं की इच्छा के विरूद्ध जाते हों। ...

20/4/19

4. अंतिम दिनों में अपने न्याय के कार्य को करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, इसके बजाय उसे देह-धारण कर, स्वयं इसे क्यों करना पड़ता है?

परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर का वचन


4. अंतिम दिनों में अपने न्याय के कार्य को करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, इसके बजाय उसे देह-धारण कर, स्वयं इसे क्यों करना पड़ता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"जैसा पिता मरे हुओं को उठाता और जिलाता है, वैसा ही पुत्र भी जिन्हें चाहता है उन्हें जिलाता है" (युहन्ना 5:22)।
"वरन् उसे न्याय करने का भी अधिकार दिया है, इसलिये कि वह मनुष्य का पुत्र है" (युहन्ना 5:27)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

19/4/19

3. देह-धारी परमेश्वर के कार्य और आत्मा के कार्य के बीच क्या अंतर है?

प्रभु यीशु,परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर का उद्धार
3. देह-धारी परमेश्वर के कार्य और आत्मा के कार्य के बीच क्या अंतर है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मूसा ने कहा, "मुझे अपना तेज दिखा दे। उसने कहा, … तू मेरे मुख का दर्शन नहीं कर सकता; क्योंकि मनुष्य मेरे मुख का दर्शन करके जीवित नहीं रह सकता" (निर्गमन 33:18-20).
"और यहोवा सीनै पर्वत की चोटी पर उतरा; और मूसा को पर्वत की चोटी पर बुलाया, और मूसा ऊपर चढ़ गया। तब यहोवा ने मूसा से कहा, "नीचे उतर के लोगों को चेतावनी दे, कहीं ऐसा न हो कि वे बाड़ा तोड़ के यहोवा के पास देखने को घुसें, और उनमें से बहुत से नष्‍ट हो जाएँ" (निर्गमन 19:20-21)।

18/4/19

2. देहधारण क्या है? देहधारण का तत्व क्या है?


2. देहधारण क्या है? देहधारण का तत्व क्या है?


संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।" (युहन्ना 1:14)।

"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ" (युहन्ना 14:6)।

5/3/19

Hindi Christian Dance Video | कट हुआ है मानव-पुत्र | Jesus the Savior Has Returned to the World

Hindi Christian Dance Video | कट हुआ है मानव-पुत्र | Jesus the Savior Has Returned to the World

दुनिया के पूरब से (पूर्व... पूर्व... ),
आई है रोशनी की किरण (रोशनी... रोशनी... ),
प्रकाशित किया पश्चिम तक जिसने।
उतर आया है मानव-पुत्र धरती पर।

4/3/19

Hindi Worship Song | आओ सिय्योन में लेकर यशगान | Praise Jesus the Savior's Second Coming

Hindi Worship Song | आओ सिय्योन में लेकर यशगान | Praise Jesus the Savior's Second Coming

आओ सिय्योन में लेकर यशगान। पहले ही प्रकट हो चुका है परमेश्वर का धाम। आओ सिय्योन में लेकर यशगान। करते उसके पवित्र नाम का सब गुणगान; ये फैल रहा है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर! सारे जहाँ का मालिक, आख़िरी मसीह, चमकता-दमकता सूरज हमारा, उदित हुआ सबसे भव्य पर्वत सिय्योन पर। सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आओ सिय्योन में लेकर यशगान। नाचें-गाएं और करें हम सब तुम्हारी जयजयकार। हम सबके उद्धारक हो तुम, कायनात के मालिक हो तुम। विजेताओं का समूह बनाया तुमने, परमेश्वर की प्रबंधन योजना पूरी की तुमने। लौट के आना होगा सबको इस पर्वत पर, प्रार्थना करनी होगी तुम्हारे सिंहासन के सम्मुख झुककर! एकमात्र सच्चे परमेश्वर तुम हो, महिमामय, माननीय तुम हो। सारी महिमा, सारा यश, सारा अधिकार, तुम्हारे सिंहासन का है।

ईसाई गाने | अनुभव वीडियो "सारी दुनिया तेरी रोशनी की पनाह में आती"

  ईसाई गाने | अनुभव वीडियो "सारी दुनिया तेरी रोशनी की पनाह में आती" (सारी दुनिया की रोशनी) दर्द-ओ-ग़म से कराहती इ...