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28/12/19

प्रभु की वाणी "परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार" (भाग दो)



प्रभु की वाणी "परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार" (भाग दो)


 यह इस बात का प्रमाण थी कि परमेश्वर का आत्मा पूरी तरह से देह में साकार हुआ है, कि परमेश्वर के देहधारण के युग में उसका देह पवित्रात्मा का समस्त कार्य करेगा। सामान्य मानवता वाला मसीह ऐसा देह है जिसमें सामान्य मानवता, सामान्य विवेक, और मानविक विचार को धारण करते हुए, आत्मा साकार होता है। "साकार होना" का अर्थ है परमेश्वर का मानव बनना, पवित्रात्मा का देह बनना; इसे स्पष्ट रूप से कहें, तो यह तब होता है जब परमेश्वर स्वयं सामान्य मानवता वाली देह में वास करता है, और इसके माध्यम से अपने दिव्य कार्य को व्यक्त करता है—यही है साकार होने या देहधारी होने का अर्थ।

26/12/19

परमेश्वर के वचन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम" (भाग एक)



परमेश्वर के वचन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम" (भाग एक)


वह कार्य जो मनुष्य के दिमाग में होता है उसे बहुत ही आसानी से मनुष्य के द्वारा प्राप्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, इस धार्मिक संसार में पास्टर एवं अगुवे अपने कार्य को करने के लिए अपने वरदानों एवं पदों पर भरोसा रखते हैं। ऐसे लोग जो लोग लम्बे समय से उनका अनुसरण करते हैं वे उनके वरदानों के द्वारा संक्रमित हो जाएंगे और जो वे हैं उनमें से कुछ के द्वारा उन्हें प्रभावित किया जाएगा। वे लोगों के वरदानों, योग्यताओं एवं ज्ञान पर ध्यान केन्द्रित करते हैं, और वे कुछ अलौकिक कार्यों और अनेक गम्भीर अवास्तविक सिद्धान्तों पर ध्यान देते हैं (हाँ वास्तव में, इन गम्भीर सिद्धान्तों को हासिल नहीं किया जा सकता है)।

21/12/19

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है" (भाग एक)


 सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है" (भाग एक)



सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "परमेश्वर ने देहधारण किया क्योंकि शैतान का आत्मा, या कोई अभौतिक चीज़ उसके कार्य का विषय नहीं है, परन्तु मनुष्य है, जो शरीर से बना है और जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया गया है। निश्चित रूप से चूँकि मनुष्य की देह को भ्रष्ट किया गया है इसलिए परमेश्वर ने हाड़-मांस के मनुष्य को अपने कार्य का विषय बनाया है; इसके अतिरिक्त, क्योंकि मनुष्य भ्रष्टता का विषय है, उसने मनुष्य को अपने उद्धार के कार्य के समस्त चरणों के दौरान अपने कार्य का एकमात्र विषय बनाया है।

15/12/19

Hindi Gospel Video | "चीनी सुसमाचार गायक-मण्डली 19वाँ प्रदर्शन" (Hindi)



Hindi Gospel Video | "चीनी सुसमाचार गायक-मण्डली 19वाँ प्रदर्शन" (Hindi)


तारों भरी, निस्तब्ध और शांत रात्रि के आकाश तले, ईसाईयों का एक समूह उत्सुकता से उद्धारकर्ता की वापसी की प्रतीक्षा करते हुए और सुखद संगीत की धुन में गाता और नाचता है। जब वे खुशी का समाचार सुनते हैं कि "परमेश्वर वापस आ गया है" और "परमेश्वर ने नए वचन कहे हैं", वे आश्चर्यचकित और उत्साहित हो जाते हैं। वे सोचते हैं: "परमेश्वर वापस आ गया है? वह पहले ही प्रकट हो चुका है?" जिज्ञासा और अनिश्चितता के साथ, एक के बाद एक, वे परमेश्वर के नए वचनों को खोजने की यात्रा में कदम रखते हैं। अपनी कर्मठ खोज में, कुछ लोग सवाल कर रहे हैं जबकि अन्य इसे सादगी से स्वीकार करते हैं। कुछ लोग टीका-टिप्पणी के बिना देखते हैं, जबकि अन्य लोग सुझाव देते हैं और बाइबल में उत्तर ढूँढ़ते हैं - वे देखते हैं लेकिन अंत में यह व्यर्थ है ...। जब वे निराश हो जाते हैं, ठीक तभी एक गवाह उनके लिए राज्य का युग बाइबल की एक प्रति लाता है, और वे पुस्तक में दिए गए वचनों से गहराई तक आकर्षित हो जाते हैं। यह किस प्रकार की पुस्तक है? क्या उन्होंने वास्तव में उन नए वचनों को पाया है जो परमेश्वर ने उस पुस्तक में कहे हैं? क्या उन्होंने परमेश्वर के प्रकटन का स्वागत किया है?

10/10/19

प्रश्न 23: प्रभु यीशु ने कहा: "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा; वरन् जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)। अधिकांश लोग सोचते हैं कि प्रभु यीशु ने हमें पहले से ही अनन्त जीवन का मार्ग प्रदान किया है, लेकिन मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के इन वचनों को पढ़ा है: "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है।" यह सब क्या है? यह क्यों कहता है कि आखिरी दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है?

उत्तर:
अनन्‍त जीवन का मार्ग वास्‍तविकता में क्‍या है, इस विषय में हमें पहले यह जानना होगा कि वह आता कहाँ से है। हम सभी जानते हैं कि जब परमेश्‍वर देहधारी हुए, तो उन्‍होंने गवाही दी कि वे ही सत्‍य हैं, मार्ग हैं, और जीवन हैं। यह इस बात का पर्याप्‍त प्रमाण है कि केवल मसीह ही अनन्‍त जीवन का मार्ग व्‍यक्‍त कर सकते हैं। चूँकि मसीह देहधारी परमेश्‍वर के प्रकटन हैं, चूँकि वे देहरूपी वस्‍त्र धारण किए हुए परमेश्‍वर के आत्‍मा हैं, इसका अर्थ यह हुआ कि मसीह का सार परमेश्‍वर का सार है, और यह कि स्‍वयं मसीह ही सत्‍य हैं, मार्ग हैं, और जीवन हैं।

14/8/19

प्रश्न 1: हमारा मानना है कि परमेश्वर की वापसी का अर्थ है कि विश्वासियों को सीधे स्वर्ग के राज्य में उठा लिया जाता है, क्योंकि यह बाइबल में लिखा हुआ है: "तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे उनके साथ बादलों पर उठा लिये जाएँगे कि हवा में प्रभु से मिलें; और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे" (1 थिस्सलुनीकियों 4:17)। तुम प्रमाणित कर रहे हो कि प्रभु यीशु वापस आ गया है, तो हम अब पृथ्वी पर क्यों हैं और अभी तक स्वर्गारोहित क्यों नहीं हुए हैं?

 उत्तर:
हमें प्रभु की उन भविष्यवाणियों के आधार पर उनकी वापसी की आशा करनी चाहिए जो उन्होंने खुद की थी। यह प्रभु की वापसी का इंतज़ार करने का सबसे मान्य तरीका है। आप दरअसल किनका हवाला दे रहे हैं? आप प्रभु के वचनों का हवाला दे रहे हैं या इंसानों के वचनों का? "तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे उनके साथ बादलों पर उठा लिये जाएँगे कि हवा में प्रभु से मिलें;" ये बात किसने कही? क्या ये प्रभु यीशु के वचन हैं? प्रभु यीशु ने ऐसी बात कभी नहीं कही। न ही पवित्र आत्मा ने कभी ऐसा कहा।

10/8/19

2. सच्चा स्वर्गारोहण क्या है?

 संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"आधी रात को धूम मची: 'देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो'" (मत्ती 25:6)।
"देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)।
"यह लिख, कि धन्य वे हैं, जो मेम्ने के विवाह के भोज में बुलाए गए हैं" (प्रकाशितवाक्य 19:9)।

14/6/19

1. परमेश्वर की आवाज़ को वास्तव मरण कैसे पहचानना चाहिए? कोई कैसे इस बात की पुष्टि कर सकता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर वास्तव में लौटा हुआ प्रभु यीशु है?

परमेश्वर का वचन
1. परमेश्वर की आवाज़ को वास्तव मरण कैसे पहचानना चाहिए? कोई कैसे इस बात की पुष्टि कर सकता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर वास्तव में लौटा हुआ प्रभु यीशु है?
 संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं; मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं" (युहन्ना 10:27)।
"मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (युहन्ना 16:12-13)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
देहधारी परमेश्वर के वचन एक नया युग आरंभ करते हैं, समस्त मानवजाति का मार्गदर्शन करते हैं, रहस्यों को प्रकट करते हैं, और एक नये युग में मनुष्य को दिशा दिखाते हैं। मनुष्य द्वारा प्राप्त की गई प्रबुद्धता मात्र एक आसान अभ्यास या ज्ञान है। वह समस्त मानवजाति को एक नये युग में मार्गदर्शन नहीं दे सकती है या स्वयं परमेश्वर के रहस्य को प्रकट नहीं कर सकती है। परमेश्वर आखिरकार परमेश्वर है, और मनुष्य मनुष्य ही है। परमेश्वर में परमेश्वर का सार है और मनुष्य में मनुष्य का सार है।
"वचन देह में प्रकट होता है" के लिए प्रस्तावना से

17/4/19

1. प्रभु यीशु ने स्वयं भविष्यवाणी की थी कि परमेश्वर आखिरी दिनों में देहधारण करेगा और कार्य करने के लिए मनुष्य के पुत्र के रूप में प्रकट होगा।


1. प्रभु यीशु ने स्वयं भविष्यवाणी की थी कि परमेश्वर आखिरी दिनों में देहधारण करेगा और कार्य करने के लिए मनुष्य के पुत्र के रूप में प्रकट होगा।


संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"तुम भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा" (लूका 12:40)।

"क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। परन्तु पहले अवश्य है कि वह बहुत दु:ख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ" (लूका 17:24-25)।

"आधी रात को धूम मची: 'देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो" (मत्ती 25:6)।

1/4/19

Hindi Christian Video "सुसमाचार दूत" क्लिप 1 - जब प्रभु यीश ने क्रूस पर, "पूरा हुआ" कहा तो इसका क्या अर्थ था?



Hindi Christian Video "सुसमाचार दूत" क्लिप 1 - जब प्रभु यीश ने क्रूस पर, "पूरा हुआ" कहा तो इसका क्या अर्थ था?


धार्मिक जगत में बहुत से लोग सोचते हैं: "प्रभु यीशु का सूली पर यह कहना 'यह पूरा हुआ' साबित करता है कि मानव जाति को बचाने का परमेश्वर का कार्य समाप्त हो गया था। प्रभु में विश्वास मात्र से, हमारे पाप क्षमा कर दिए जाते हैं, आस्था से से हमारा न्याय होता है और अनुग्रह से हम बचा लिये जाते हैं। प्रभु जब आएगा तो वे हमें स्वर्ग के राज्य में ले जाएगा। वह संभवतः उद्धार का कोई और कार्य नहीं कर सकता।" क्या यह विचार परमेश्वर के कार्य के तथ्यों के अनुरूप है?

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