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18/7/19

1. सच्चाई क्या है? बाइबल का ज्ञान और सिद्धांत क्या है?

 संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"आदि में वचन था, और वचन परमेश्‍वर के साथ था, और वचन परमेश्‍वर था।" "और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, …" (युहन्ना 1:1, 14)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ" (युहन्ना 14:6)।
"सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर: तेरा वचन सत्य है" (युहन्ना 17:17)।

6/7/19

3. क्यों परमेश्वर के कार्य का हर नया चरण धार्मिक दुनिया की प्रचंड अवज्ञा और निंदा का सामना करता है? इसका मूल कारण क्या है?

यीशु
3. क्यों परमेश्वर के कार्य का हर नया चरण धार्मिक दुनिया की प्रचंड अवज्ञा और निंदा का सामना करता है? इसका मूल कारण क्या है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"फिर वह दृष्‍टान्तों में उनसे बातें करने लगा: 'किसी मनुष्य ने दाख की बारी लगाई, और उसके चारों ओर बाड़ा बाँधा, और रस का कुण्ड खोदा, और गुम्मट बनाया; और किसानों को उसका ठेका देकर परदेश चला गया। फिर फल के मौसम में उसने किसानों के पास एक दास को भेजा कि किसानों से दाख की बारी के फलों का भाग ले। पर उन्होंने उसे पकड़कर पीटा और छूछे हाथ लौटा दिया। फिर उसने एक और दास को उनके पास भेजा; उन्होंने उसका सिर फोड़ डाला और उसका अपमान किया।

18/6/19

1. अंतिम दिनों में परमेश्वर ने चीन में देह-धारण किया है; बाइबल की भविष्यवाणियों में और परमेश्वर के वचनों में इसके लिए क्या आधार मिलता है?

बाइबल
1. अंतिम दिनों में परमेश्वर ने चीन में देह-धारण किया है; बाइबल की भविष्यवाणियों में और परमेश्वर के वचनों में इसके लिए क्या आधार मिलता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक जाति-जाति में मेरा नाम महान् है, और हर कहीं मेरे नाम पर धूप और शुद्ध भेंट चढ़ाई जाती है" (मलाकी 1:11)।
"क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा" (मत्ती 24:27)।

13/6/19

6. बाइबल के साथ वास्तव में कैसे पेश आना चाहिए और उसका उपयोग किस तरह से करना चाहिए कि वह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हो? बाइबल का मूलभूत मूल्य क्या है?

6. बाइबल के साथ वास्तव में कैसे पेश आना चाहिए और उसका उपयोग किस तरह से करना चाहिए कि वह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हो? बाइबल का मूलभूत मूल्य क्या है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
आज, मैं इस रीति से बाइबल की चीरफाड़ कर रहा हूँ और इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं इस से नफरत करता हूँ, या सन्दर्भ के लिए इसके मूल्य को नकारता हूँ। अंधकार में रखे जाने से तुम्हें रोकने के लिए मैं तुम्हारे लिए बाइबल के अंतर्निहित मूल्यों और इसकी उत्पत्ति की व्याख्या कर रहा हूँ। क्योंकि बाइबल के बारे में लोगों के अनेक दृष्टिकोण हैं, और उनमें से अधिकांश ग़लत हैं; इस तरह से बाइबल पढ़ना न केवल उन्हें उन चीज़ों को प्राप्त करने से रोकता है जो उन्हें प्राप्त करनी चाहिए, बल्कि, अधिक महत्वपूर्ण यह है, कि यह उस कार्य में भी बाधा डालता है जिसे करने का मैं इरादा करता हूँ। यह भविष्य के कार्य के लिए एक बहुत ही जबर्दस्त उपद्रव है, और केवल कमियाँ प्रदान करता है, लाभ नहीं। इस प्रकार, जो मैं तुम्हें शिक्षा दे रहा हूँ वह केवल बाइबल के मुख्य तत्व और उसके भीतर की कहानी है। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि तुम बाइबल मत पढ़ो, या तुम आस-पास जाकर यह घोषणा करो कि यह पूर्णतः मूल्य विहीन है, बल्कि यह कि तुम्हारे पास बाइबल का सही ज्ञान और दृष्टिकोण हो। बहुत अधिक एक तरफा न बनो! यद्यपि बाइबल इतिहास की एक पुस्तक है जो मनुष्यों के द्वारा लिखी गई थी, फिर भी यह बहुत से सिद्धांतों को जिनके द्वारा प्राचीन संतों और नबीयों ने परमेश्वर की सेवा की, और साथ ही परमेश्वर की सेवा में हाल ही के प्रेरितों के अनुभवों को भी प्रलेखित करती - इन लोगों के द्वारा इन सभी चीज़ों को वास्तव में देखा और जाना गया था, और सच्चे मार्ग का अनुसरण करने में वे इस युग के लोगों के लिए एक सन्दर्भ के रूप में कार्य कर सकते हैं। इस प्रकार, बाइबल को पढ़ने से लोग जीवन के अनेक मार्गों को भी प्राप्त कर सकते हैं जिन्हें अन्य पुस्तकों में नहीं पाया जा सकता है। ये मार्ग पवित्र आत्मा के कार्य के जीवन के मार्ग हैं जिनका अनुभव नबीयों और प्रेरितों के द्वारा बीते युगों में किया गया था, और बहुत से वचन बहुमूल्य हैं, और वह प्रदान कर सकते हैं जिसकी लोगों को आवश्यकता है। इस प्रकार, सभी लोग बाइबल को पढ़ना चाहते हैं। क्योंकि बाइबल में इतना कुछ छिपा हुआ है, इसके प्रति लोगों का नज़रिया महान आध्यात्मिक हस्तियों के लेखों से प्रति नज़रिए से भिन्न है। बाइबल ऐसे लोगों के अनुभवों एवं ज्ञान का अभिलेख एवं संकलन है जिन्होंने पुराने एवं नए युग में यहोवा और यीशु की सेवा की, और इस लिए बाद की पीढ़ियाँ इससे अधिक मात्रा में ज्ञानोदय, अलौकिक प्रकाश, और अनुशीलन करने हेतु मार्गों को प्राप्त कर पाने में सक्षम रही हैं। बाइबल किसी भी महान आध्यात्मिक हस्ती के लेखों से उच्चतर है उसका कारण है क्योंकि उसके समस्त लेख बाइबल में से ही लिए गए हैं, एवं उसके समस्त अनुभव बाइबल में से ही आए हैं, और वे सभी बाइबल का ही वर्णन करते हैं। और इस प्रकार, यद्यपि लोग किसी भी महान आध्यात्मिक हस्ती की किताबों से प्रावधान प्राप्त कर सकते हैं, फिर भी वे बाइबल की ही आराधना करते हैं, क्योंकि यह उनको इतनी ऊँची और गम्भीर दिखाई देती है! यद्यपि बाइबल जीवन के वचनों की कुछ पुस्तकों को एक साथ मिलाती है, जैसे कि पौलुस के धर्मपत्र और पतरस के धर्मपत्र, और यद्यपि इन पुस्तकों के द्वारा लोगों की आवश्यकताओं को प्रदान किया जा सकता है और उनकी सहायता की जा सकती है, फिर भी ये पुस्तकें अप्रचिलत हैं, और ये अभी भी पुराने युग से सम्बन्धित हैं, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वे कितनी अच्छी हैं, वे केवल एक युग के लिए ही उचित हैं, और चिरस्थायी नहीं हैं। क्योंकि परमेश्वर का कार्य निरन्तर विकसित हो रहा है, और यह केवल पौलुस और पतरस के समय में ही नहीं रूक सकता है, या हमेशा अनुग्रह के युग में बना नहीं रह सकता है जिस में यीशु को सलीब पर चढ़ाया गया था। और इसलिए, ये पुस्तकें केवल अनुग्रह के युग के लिए उचित हैं, अंत के दिनों के राज्य के युग के लिए नहीं। ये केवल अनुग्रह के युग के विश्वासियों की जरूरतों को प्रदान कर सकती हैं, राज्य के युग के संतों की नहीं, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितनी अच्छी हैं, वे तब भी पुरानी हैं। यहोवा की सृष्टि के कार्य या इस्राएल में उसके काम के साथ भी ऐसा ही हैः इस से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि यह कार्य कितना बड़ा था, यह अभी भी पुराना था, और वह समय अब भी आएगा जब यह ख़त्म हो जाएगा। परमेश्वर का काम भी ऐसा ही हैः यह महान है, किन्तु एक ऐसा समय आएगा जब यह समाप्त हो जाएगा; यह न तो सृष्टि के कार्य के बीच, और न ही सलीब पर चढ़ने के कार्य के बीच, हमेशा बना रह सकता है। इस से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि सलीब पर चढ़ने का कार्य कितना विश्वास दिलाने वाला था, इस से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि शैतान को हराने में यह कितना असरदार था, कार्य, आख़िरकार, तब भी कार्य ही है, और युग, आख़िरकार, तब भी युग ही हैं; कार्य हमेशा उसी नींव पर टिका नहीं रह सकता है, और न ही समय ऐसे होते हैं जो कभी नहीं बदल सकते हैं, क्योंकि सृष्टि हुई थी और अंत के दिन भी अवश्य होने चाहिए। यह अवश्यम्भावी है!
"वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (4)" से

11/6/19

4. बाइबल में अनन्त जीवन का कोई मार्ग नहीं है; यदि मनुष्य बाइबल को थामे रहता है और उसकी आराधना करता है, तो वह अनन्त जीवन को प्राप्त नहीं करेगा।

4. बाइबल में अनन्त जीवन का कोई मार्ग नहीं है; यदि मनुष्य बाइबल को थामे रहता है और उसकी आराधना करता है, तो वह अनन्त जीवन को प्राप्त नहीं करेगा।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, या ढूँढ़ो क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (युहन्ना 5:39-40)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता" (युहन्ना 14:6)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
जीवन का मार्ग कोई साधारण चीज़ नहीं है जो चाहे कोई भी प्राप्त कर ले, न ही इसे सभी के द्वारा आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। यह इसलिए कि जीवन केवल परमेश्वर से ही आता है, कहने का अर्थ है कि केवल स्वयं परमेश्वर ही जीवन के तत्व का अधिकारी है, स्वयं परमेश्वर के बिना जीवन का मार्ग नहीं है, और इसलिए केवल परमेश्वर ही जीवन का स्रोत है, और जीवन के जल का सदा बहने वाला सोता है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है" से

9/6/19

3. बाइबल मनुष्य द्वारा संकलित की गई थी, परमेश्वर द्वारा नहीं; बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती।

3. बाइबल मनुष्य द्वारा संकलित की गई थी, परमेश्वर द्वारा नहीं; बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (युहन्ना 5:39-40)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता" (युहन्ना 14:6)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
बाइबल इस्राएल में परमेश्वर के कार्य का ऐतिहासिक अभिलेख है, और प्राचीन नबीयों की अनेक भविष्यवाणियों और साथ ही उस समय उसके कार्य में यहोवा के कुछ कथनों को प्रलेखित करती है। इस प्रकार, सभी लोग इस पुस्तक को "पवित्र" (क्योंकि परमेश्वर पवित्र और महान है) मानते हैं। वास्तव में, यह सब यहोवा के लिए उनके आदर और परमेश्वर के लिए उनकी श्रद्धा का परिणाम है। लोग केवल इसलिए इस रीति से इस पुस्तक की ओर संकेत करते हैं क्योंकि परमेश्वर के जीवधारी अपने सृष्टिकर्ता के प्रति बहुत श्रद्धावान हैं, और ऐसे लोग भी हैं जो इस पुस्तक को एक "स्वर्गीय पुस्तक" कहते हैं। वास्तव में, यह मात्र एक मानवीय अभिलेख है। यहोवा द्वारा व्यक्तिगतरूप से इसका नाम नहीं रखा गया था, और न ही यहोवा ने व्यक्तिगत रूप से इसकी रचना कामार्गदर्शन किया था। दूसरे शब्दों में, इस पुस्तक का ग्रन्थकार परमेश्वर नहीं था, बल्कि मनुष्य था। "पवित्र" बाइबल ही केवल वह सम्मानजनक शीर्षक है जो इसे मनुष्य के द्वारा दिया गया है। इस शीर्षक का निर्णय यहोवा और यीशु के द्वारा आपस में विचार विमर्श करने के बाद नहीं लिया गया था; यह मानव विचार से अधिक कुछ नहीं है। क्योंकि इस पुस्तक को यहोवा के द्वारा नहीं लिखा गया था, और यीशु के द्वारा तो कदापि नहीं। इसके बजाए, यह अनेक प्राचीन नबीयों, प्रेरितों और पैगंबरों का लेखा-जोखा है, जिन्हें बाद की पीढ़ियों के द्वारा प्राचीन लेखों की एक ऐसी पुस्तक के रूप में संकलित किया गया था जो, लोगों को, विशेष रूप से पवित्र दिखाई देती है, एक ऐसी पुस्तक जिसमें वे मानते हैं कि अनेक अथाह और गम्भीर रहस्य हैं जो भविष्य की पीढ़ियों के द्वारा प्रकट किए जाने का इन्तज़ार कर रहे हैं। वैसे तो, लोग यह विश्वास करने में और भी अधिक उतारू हो गए कि यह पुस्तक एक "दिव्य पुस्तक" है। चार सुसमाचारों और प्रकाशित वाक्य की पुस्तक के शामिल होने के साथ ही, इसके प्रति लोगों की प्रवृत्ति किसी भी अन्य पुस्तक से विशेष रूप से भिन्न है, और इस प्रकार कोई भी इस "दिव्य पुस्तक" को चीरफाड़ करने की हिम्मत नहीं करता है-क्योंकि यह बहुत ही अधिक "पवित्र" है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (4)" से

8/6/19

2. धार्मिक दुनिया का मानना है कि सभी शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से दिए गए हैं और ये सब परमेश्वर के ही वचन हैं; इस कथन के प्रति हर किसी को क्या विवेक रखना चाहिए?

बाइबल
2. धार्मिक दुनिया का मानना है कि सभी शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से दिए गए हैं और ये सब परमेश्वर के ही वचन हैं; इस कथन के प्रति हर किसी को क्या विवेक रखना चाहिए?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
बाइबल की हर चीज़ परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत रूप से बोले गए वचनों का लिखित दस्तावेज़ नहीं है। बाइबल सामान्यतः परमेश्वर के कार्य की पिछली दो अवस्थाओं का आलेख करती है, उसमें से एक भाग है जो पैग़म्बरों की भविष्यवाणियों का लिखित दस्तावेज़ है, और एक भाग वह अनुभव और ज्ञान है जिन्हें युगों के दौरान उन लोगों के द्वारा लिखा गया था जिन्हें परमेश्वर के द्वारा इस्तेमाल किया गया था। मानवीय अनुभवों को मानवीय अनुमानों और ज्ञान के साथ दूषित किया गया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। बाइबल की बहुत सी पुस्तकों में मानवीय धारणाएँ, मानवीय पक्षपात, और मनुष्यों के बेतुके अनुवाद हैं। हाँ वास्तव में, बहुत सारे वचन पवित्र आत्मा के प्रकाशन और अलौकिक ज्ञान का परिणाम हैं और वे सही अनुवाद हैं - फिर भी यह अभी नहीं कहा जा सकता है कि वे पूरी तरह सत्य की सही अभिव्यक्ति हैं। कुछ निश्चित चीज़ों पर उनका दृष्टिकोण व्यक्तिगत अनुभव के ज्ञान, या पवित्र आत्मा के प्रकाशन से बढ़कर और कुछ भी नहीं है। पैग़म्बरों के पूर्वकथनों को परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत रीति से निर्देशित किया गया थाः यशायाह, दानिय्येल, एज्रा, यिर्मयाह और यहेजकेल की भविष्यवाणियाँ पवित्र आत्मा के सीधे निर्देशन से आई थीं। ये लोग दर्शी थे, उन्होंने भविष्यवाणी की आत्मा को प्राप्त किया था, और वे सभी पुराने नियम के पैग़म्बर थे। व्यवस्था के युग के दौरान इन लोगों ने, जिन्होंने यहोवा की अभिप्रेरणाओं को प्राप्त किया था, अनेक भविष्यवाणियाँ की थीं, जिन्हें सीधे यहोवा के द्वारा निर्देशित किया गया था।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "बाइबल के विषय में (3)" से

7/6/19

1. बाइबल केवल व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग में परमेश्वर के कार्य के दो चरणों का एक आलेख (रिकॉर्ड) है; यह परमेश्वर के कार्य की संपूर्णता का आलेख नहीं है।

1. बाइबल केवल व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग में परमेश्वर के कार्य के दो चरणों का एक आलेख (रिकॉर्ड) है; यह परमेश्वर के कार्य की संपूर्णता का आलेख नहीं है।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (युहन्ना 16:12-13)।
"जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" (प्रकाशितवाक्य 2:17)।
"देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्त हुआ है" (प्रकाशितवाक्य 5:5)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
पूरी बाइबिल में दो युगों का कार्य दर्ज किया गया है: एक व्यवस्था के युग का कार्य था, और एक अनुग्रह के युग का कार्य था। पुराने विधान (ओल्ड टेस्टामेंट) में इस्राएलियों के लिए यहोवा के वचनों को और इस्राएल में उसके कार्यों कोदर्ज किया गया है; नये विधान में यहूदिया में यीशु के कार्य को दर्ज किया गया है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "परमेश्वर के कार्य का दर्शन (2)" से

1/6/19

1. परमेश्वर को जानना वास्तव में क्या है? क्या बाइबल की जानकारी और धार्मिक सिद्धांत को समझना, परमेश्वर को जानना माना जा सकता है?

बाइबल


1. परमेश्वर को जानना वास्तव में क्या है? क्या बाइबल की जानकारी और धार्मिक सिद्धांत को समझना, परमेश्वर को जानना माना जा सकता है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर को जानने का क्या अभिप्राय है? इसका अभिप्राय है कि मनुष्य परमेश्वर की भावनाओं के विस्तार को जानता है, परमेश्वर को जानना यही है। आप कहते हैं कि आपने परमेश्वर को देखा है, फिर भी आप परमेश्वर की भावनाओं के विस्तार को नहीं जानते हैं, उनके स्वभाव को नहीं जानते हैं, और उनकी धार्मिकता को भी नहीं जानते हैं। आपको उनकी दयालुता की कोई समझ नहीं है, और आप नहीं जानते हैं कि वे किससे घृणा करते हैं। इसे परमेश्वर को जानना नहीं कहा जा सकता है। इसलिए, कुछ लोग परमेश्वर का अनुसरण करने में सक्षम हैं, किन्तु वे आवश्यक रूप से परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते हैं। यही अंतर है। यदि आप उन्हें जानते हैं, उन्हें समझते हैं, यदि जो उनकी इच्छा है उसमें से आप कुछ को समझने एवं ग्रहण करने में सक्षम हैं, और आप उनके ह्रदय को जानते हैं, तो आप सचमुच उन पर विश्वास कर सकते हैं, सचमुच में उनके प्रति समर्पित हो सकते हैं, सचमुच में उनसे प्रेम कर सकते हैं, और सचमुच में उनकी आराधना कर सकते हैं। यदि आप इन चीज़ों को नहीं समझते हैं, तो आप सिर्फ एक व्यक्ति का अनुसरण कर रहे हैं जो केवल भीड़ के साथ में दौड़ता और उसका अनुसरण करता है। इसे सच्चा समर्पण नहीं कहा जा सकता है, और इसे सच्ची आराधना नहीं कहा जा सकता है। सच्ची आराधना को कैसे उत्पन्न किया जा सकता है? ऐसा कोई भी नहीं है जो परमेश्वर को देखता और सचमुच में परमेश्वर को जानता हो जो उनकी आराधना नहीं करता हो, और जो उनका आदर न करता हो। जैसे ही वे परमेश्वर को देखते हैं वे भयभीत हो जाते हैं। वर्तमान में लोग देहधारी परमेश्वर के कार्य के युग में हैं। लोगों के पास देहधारी परमेश्वर के स्वभाव और जो उनके पास है तथा जो वे हैं इस बात की जितनी अधिक समझ होती है, उतना ही अधिक लोग उन्हें संजोकर रखते हैं, और उतना ही अधिक वे परमेश्वर का आदर करते हैं। प्राय:, कम समझ का अर्थ है अधिक दुस्साहस, इतना कि परमेश्वर से मनुष्य के समान बर्ताव किया जाता है। यदि लोग वास्तव में परमेश्वर को जानें और वास्तव में उसे देखें तो वेभयभीत हों जाएगे और काँपने लगेंगे। यूहन्ना ने ऐसा क्यों कहा, "वह जो मेरे बाद आ रहा है, जिसकी जूतियाँ उठाने के योग्य भी मैं नहीं हूँ?" यद्यपि उसके हृदय की उसकी समझ बहुत गहरी नहीं थी, फिर भी वह जानता था कि परमेश्वर अति विस्मयजनक है। कितने लोग अब परमेश्वर का आदर करने में सक्षम हैं? परमेश्वर के स्वभाव को जाने बिना, कोई व्यक्ति किस प्रकार उनका आदर कर सकता है? यदि लोग मसीह के सार को नहीं जानते हैं, और परमेश्वर के स्वभाव को नहीं समझते हैं, तो वे सचमुच में परमेश्वर की आराधना करने के योग्य तो बिलकुल भी नहीं हैं। यदि लोग सिर्फ मसीह के साधारण और सामान्य बाहरी रूप को देखते हैं और उसके सार को नहीं जानते हैं, तो मसीह के साथ एक सामान्य मनुष्य के रूप में बर्ताव करना लोगों के लिए आसान है। वे उनके प्रति एक अपमानजनक प्रवृत्ति अपना सकते हैं, उन्हें धोखा दे सकते हैं, उनका प्रतिरोध कर सकते हैं, उसकी अवज्ञा कर सकते हैं, उस पर दोष लगा सकते हैं, और दुराग्रही हो सकते हैं। वे उसके वचन को महत्वहीन मान सकते हैं, उसकी देह के साथ जैसा चाहे वैसा बर्ताव कर सकते हैं, अवधारणाओं को आश्रय दे सकते हैं, और ईशनिंदा कर सकते हैं। इन मुद्दों को सुलझाने के लिए व्यक्ति को मसीह के सार, एवं मसीह की ईश्वरीयता को अवश्य जानना चाहिए। परमेश्वर को जानने का यही मुख्य पहलू है; यह वह है जिसमें व्यावहारिक परमेश्वर पर विश्वास करने वाले सभी लोगों को अवश्य प्रवेश करना और उसे प्राप्त करना चाहिए।
"मसीह की बातचीतों के अभिलेख" से "देहधारण का ज्ञान" से

20/11/18

पवित्र आत्मा का वचन "तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए"

पवित्र आत्मा का वचन "तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए"


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "अपने दैनिक जीवन में तुम लोग एक ऐसे वातावरण में रहते हो जिसमें कोई सत्य या भला एहसास नहीं है। तुम में अस्तित्व में बने रहने के लिए प्रधान वस्तु की कमी है और मुझे या सत्य को जानने के लिए तुम लोगों के पास आधार नहीं है। तुम्हारा विश्वास महज एक ऐसे अस्पष्ट भरोसे पर
या धार्मिक रीति-रिवाजों और ज्ञान के ऊपर बना हुआ है जो पूरी तरह सिद्धांतों पर टिका हुआ है। प्रतिदिन मैं तुम लोगों के क्रियाकलापों को देखता हूँ और तुम लोगों के इरादों और बुरे परिणामों की जाँच करता हूँ। मुझे कभी भी ऐसा कोई नहीं मिला जो सचमुच में अपना हृदय और अपनी आत्मा मेरी वेदी के ऊपर रखे, जिसे कभी हटाया न गया हो। इसलिए जिन्हें मैं ऐसी मानवजाति के ऊपर प्रकट करना चाहता हूँ, उन सभी वचनों को व्यर्थ में नहीं उण्डेलना चाहता। अपने हृदय में, मैं केवल अपने अपूर्ण कार्यों को पूरा करने और उस मानवजाति का उद्धार करने की योजना बना रहा हूँ जिन्हें मुझे बचाना है।

3/11/18

Hindi Christian Video (3) - प्रभु की वापसी का अध्‍ययन करने के लिए हमें परमेश्‍वर की वाणी सुननी चाहिए

Hindi Christian Video (3) - प्रभु की वापसी का अध्‍ययन करने के लिए हमें परमेश्‍वर की वाणी सुननी 

चाहिए


प्रभु के पुनरागमन से संबंधित बाइबल में उल्‍लेखित लगभग सभी भविष्‍यवाणियां पहले ही सच हो चुकी हैं। अधिकांश लोगों ने यह महसूस किया है कि प्रभु पहले ही वापिस आ चुके हैं, तो, हम किस तरह इसकी जांच करें ताकि इस विषय पर निश्चित हो सकें कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ही प्रभु यीशु का पुनरागमन है या नहीं? क्‍या हमें अपना निर्णय बाइबल की भविष्‍यवाणियों पर आधारित करना चाहिए या सीधे तौर पर सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचन और कार्य की जांच करनी चाहिए? किस प्रकार हमें इस अत्‍यधिक दुर्लभ अवसर का लाभ उठाना चाहिए और अपने प्रभु की वापसी का स्‍वागत करना चाहिए? सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर कहते हैं, "तुम्हें जो करना चाहिए वह है बाइबल से बिना और सबूत की आवश्यकता के, किसी भी कार्य को स्वीकार करना, जब तक कि यह पवित्र आत्मा का है, क्योंकि तुम परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए परमेश्वर पर विश्वास करते हो, न कि उसकी जाँच-पड़ताल करने के लिए। यह दिखाने के लिए कि मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ तुम्हें और सबूत नहीं खोजने चाहिए।

31/10/18

Hindi Christian Video clip (2) - धार्मिक जगत में इतनी वीरानी क्‍यों व्‍याप्‍त है?

Hindi Christian Video clip (2) - धार्मिक जगत में इतनी वीरानी क्‍यों व्‍याप्‍त है?


पूरा धार्मिक जगत इस समय एक गंभीर दुष्‍काल से गुज़र रहा है, वे अब और पवित्र आत्‍मा के कार्य के साथ अथवा प्रभु की उपस्थिति में नहीं हैं, वे अधिक-से-अधिक बुरे कर्म कर रहे हैं, और विश्‍वासियों की आस्‍था और करूणा कमज़ोर और निरूत्‍साही होती जा रही है। इसके अतिरिक्‍त, पूरे विश्‍व में आपदायें और अधिक गंभीर होती जा रही हैं, तथा अंत के दिनों में प्रभु का पुनरागमन होगा ऐसी भविष्‍यवाणियां पहले ही सच हो चुकी हैं।

Hindi Christian Video clip (1) - परमेश्‍वर के कार्य के पदचिन्‍हों को कैसे खोजें

Hindi Christian Video clip (1) - परमेश्‍वर के कार्य के पदचिन्‍हों को कैसे खोजें

कलीसिया की वीरानी और आत्‍मा के अंधकार के समक्ष, हमें किस तरह प्रभु के पदचिन्‍हों की खोज करना चाहिए? प्राचीन काल से ही सच्‍चा मार्ग उत्‍पीड़न का शिकार रहा है, और सच्‍चे परमेश्‍वर के प्रकटन और कार्य को हमेशा धार्मिक जगत और नास्तिक सरकारों द्वारा सर्वाधिक क्रूर दबाव और अत्‍याचार तथा सबसे उन्‍मादी विरोध और निंदा का सामना करते रहना पड़ा है।

29/10/18

Hindi Christian Variety Show | मेरे पादरी पिता | A Debate on the Bible in a Family (Skit 2018)

Hindi Christian Variety Show | मेरे पादरी पिता | A Debate on the Bible in a Family (Skit 2018)


ची शू एक ऐसे धार्मिक पादरी हैं जो चालीस साल से प्रभु में आस्था रखते आ रहे हैं। उनका हमेशा मानना रहा है कि प्रभु के सारे वचन और कार्य बाइबल में दर्ज हैं, और प्रभु में आस्था का मतलब बाइबल से आस्था हटना नहीं है और बाइबल में विश्वास रखने का मतलब है प्रभु में विश्वास रखना।

20/10/18

कलिसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन-सातवाँ कथन"


कलिसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन-सातवाँ कथन"


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "मेरे लोगो, जब तुम लोग मेरे वचनों को सुनते हो, तो क्या तुम लोग मेरी इच्छा को समझते हो? क्या तुम लोग मेरे हृदय को देखते हो? अतीत में, जब तुम लोग सेवा के पथ पर यात्रा कर रहे थे, तो तुम लोग उतार-चढ़ाव से होकर गुज़रे थे, तुम लोगों ने प्रगतियों और असफलताओं का सामना किया था, और ऐसे समय भी आए थे जब तुम लोग नीचे गिरने के ख़तरे में थे और यहाँ तक कि मुझसे विश्वासघात करने वाले थे; लेकिन क्या तुम लोग जानते थे कि हर घड़ी मैं हमेशा तुम लोगों को बचाने के कार्य में लगा हुआ था? यह कि तुम लोगों को बुलाने और बचाने के लिए हर पल मैं हमेशा आवाज़ लगा रहा था?

7/10/18

मसीह के कथन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (भाग छे: के क्रम में)

मसीह के कथन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (भाग छे: के क्रम में)

अंतिम दिनों के मसीह के कथन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (भाग छे: के क्रम में) इस वीडियो में परमेश्वर के वचन "वचन देह में प्रकट होता है" पुस्तक से हैं। इस वीडियो की सामग्री: अय्यूब की गवाही परमेश्वर के लिए सुकून लेकर आती है हालाँकि परमेश्वर ने अय्यूब पर अपने आपको प्रकट नहीं किया था, फिर भी अय्यूब ने परमेश्वर की संप्रभुता पर विश्वास किया परमेश्वर में अय्यूब का विश्वास नहीं हिला क्योंकि परमेश्वर उससे छिपा हुआ था

3/10/18

कलिसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन "तुम किस के प्रति वफादार हो?"

कलिसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन "तुम किस के प्रति वफादार हो?"


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "क्योंकि इन वर्षों में, मैंने तुम में से किसी से कभी भी कोई वफादारी प्राप्त नहीं की है। इन वर्षों में, तुमने मेरा अनुसरण किया है, फिर भी तुमने मेरे प्रतिवफादारी नहीं दिखाई है। इसके बजाए, तुम उन लोगों के चारों ओर घूमते रहे हो जिनसे तुम प्रेम करते हो और ऐसी चीज़ों के चारों ओर जो तुम्हें प्रसन्न करती हैं, इतना ज़्यादा कि उन्हें हृदय के करीब रख लिया और उन्हें कभी भी, किसी भी समय, कहीं भी छोड़ा नहीं।......

1/10/18

अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V परमेश्वर की पवित्रता (II)" (भाग एक)


अंतिम दिनों के मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V परमेश्वर की पवित्रता (II)" (भाग एक)


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "यह इसलिए है कि लोग गलत स्वभाव के मध्य जीते और एक बुरे और गंदे जगत में रहते हैं। वे जो कुछ देखते हैं, वे जो कुछ छूते हैं, वे जो कुछ अनुभव करते हैं, वह शैतान की बुराई और शैतान का भ्रष्टाचार है, साथ ही साथ कुचक्र,अंतर्कलह और युद्ध होते हैं, जो उन लोगों के बीच होते हैं जो शैतान के प्रभाव में होते हैं।

27/9/18

"वे कौन हैं जो वापस आए हैं" (7) - मसीह के आसन के सामने न्याय का अनुभव करने के साक्ष्य


Hindi Christian Movie clip "वे कौन हैं जो वापस आए हैं" (7) - मसीह के आसन के सामने न्याय का अनुभव करने के साक्ष्य


यद्यपि हम एक बार परमेश्वर में विश्वास कर लें तो हम पाप-मुक्त कर दिए जाते हैं, लेकिन हम फिर भी पाप के बीच जीते हैं, प्रतिदिन पाप करते हैं फिर पापों को स्वीकार करते हैं और सभी उस समय के लिये तड़पते हैं जब हम अब और कोई पाप नहीं करेंगे या परमेश्वर की अवहेलना नहीं करेंगे। अंत के दिनों में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर हमारे शैतानी स्वभाव और पापी प्रकृति का समाधान करने के लिए अपना न्याय का कार्य करता है।

26/9/18

पवित्र आत्मा के वचन "तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है"


पवित्र आत्मा के वचन "तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है"


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "परमेश्वर में विश्वास करना इतना आसान नहीं है जैसा कि मनुष्य कह सकता है। जैसे कि परमेश्वर इसे देखता है, यदि तुम्हारे पास सिर्फ़ ज्ञान है किन्तु जीवन के रूप में उसका वचन नहीं है; यदि तुम सिर्फ़ अपने स्वयं के ज्ञान तक ही सीमित हो परन्तु सत्य का अभ्यास नहीं कर सकते हो या परमेश्वर के वचन को जी नहीं सकते हो, तो तब भी यह प्रमाण है कि तुम्हारे पास परमेश्वर को प्रेम करने वाला हृदय नहीं है, और दर्शाता है कि तुम्हारा हृदय परमेश्वर से संबंधित नहीं है।

ईसाई गाने | अनुभव वीडियो "सारी दुनिया तेरी रोशनी की पनाह में आती"

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