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19/9/19

प्रश्न 19: तुम इसकी गवाही देते हो कि अंतिम दिनों में परमेश्वर मनुष्य को पूरी तरह से शुद्ध करने और बचाने के लिए न्याय के अपने कार्य को करता है, परन्तु सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त वचनों को पढ़ने के बाद, मुझे लगता है कि उनमें से कुछ मनुष्य की निंदा करते और उसे शाप देते हैं। यदि परमेश्वर मनुष्य को निन्दित और शापित करता है, तो क्या मनुष्य को सजा भुगतनी नहीं होगी? और तुम यह कैसे कह सकते हो कि इस तरह का न्याय मानव जाति को शुद्ध करता और बचाता है?

उत्तर:
अंत के दिनों में, परमेश्‍वर सत्‍य को व्यक्त करने और विजेताओं का एक समूह बनाने के लिए न्याय का कार्य करते हैं, ऐसे लोगों का एक समूह जो परमेश्‍वर के साथ एकमन और एकदिल हैं। यह तभी तय कर लिया गया था जब परमेश्‍वर ने दुनिया बनायी थी। लेकिन ऐसे कुछ व्यक्ति हैं जो देखते हैं कि परमेश्‍वर के कुछ वचनों में लोगों की निंदा और शाप हैं और वे अवधारणाएं बना लेते हैं। यह खासकर इसलिए है क्योंकि वे परमेश्‍वर के कार्य को नहीं जानते।

18/9/19

प्रश्न 18: तुम गवाही देते हो कि अंतिम दिनों में परमेश्वर सत्य को व्यक्त करता है और मनुष्य को पहचानने और शुद्ध करने का कार्य करता है, तो परमेश्वर कैसे न्याय करता है, शुद्ध करता है और मनुष्य को बचाता है?

उत्तर:
हर कोई जो वर्तमान में सच्‍चे मार्ग की खोज और जाँच करता है, वो यह समझना चाहता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर, अंत के दिनों का अपना न्याय कार्य कैसे करते हैं। सत्‍य के इस पहलू के संबंध में सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ने बहुत सारे वचनों को व्यक्त किया है। आइये हम सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचन के कुछ अंश पढ़ते हैं।
सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "इस समय जब परमेश्वर देहधारी हुआ है, तो उसका कार्य, प्राथमिक रूप में ताड़ना और न्याय के द्वारा, अपने स्वभाव को व्यक्त करना है।

14/9/19

प्रश्न 17: तुम यह गवाही देते हो कि परमेश्वर ने सत्य को व्यक्त करने के लिए और आखिरी दिनों में मनुष्य के न्याय और शुद्धि के कार्य को करने के लिए वापस देहधारण किया है, लेकिन धार्मिक पादरियों और प्राचीन लोगों का विश्वास है कि परमेश्वर बादलों के साथ वापस लौटेगा, और जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं, वे एक पल में रूपांतरित हो जाएँगे और बादलों में परमेश्वर के साथ मिलने के लिए स्वर्गारोहित होंगे, जैसा कि पौलुस ने कहा था: "पर हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहाँ से आने की बाट जोह रहे हैं। वह अपनी शक्‍ति के उस प्रभाव के अनुसार जिसके द्वारा वह सब वस्तुओं को अपने वश में कर सकता है, हमारी दीन-हीन देह का रूप बदलकर, अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा" (फिलिप्पियों 3:20-21)। परमेश्वर सर्वशक्तिमान है और ऐसा कुछ भी नहीं है जो वह नहीं कर सकता है। परमेश्वर हमें बदल देगा और हमें पवित्र बना देगा, वह सिर्फ एक ही वचन के साथ इसे प्राप्त कर लेगा। तो फिर उसे सत्य व्यक्त करने और मनुष्य के न्याय और शुद्धि के कार्य के एक चरण को पूरा करने के लिए अब भी देह बनने की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर:
परमेश्वर का कार्य सदा अथाह होता है। परमेश्वर की भविष्यवाणियों को कोई भी स्पष्टता से नहीं समझा सकता। मनुष्य साकार होने पर ही किसी भविष्यवाणी को समझ सकता है। इसका क्या अर्थ है? इसका अर्थ है कि कोई भी परमेश्वर की बुद्धिमत्ता और सर्वशक्तिमत्ता की थाह नहीं पा सकता। जब अनुग्रह के युग में कार्य करने के लिए प्रभु यीशु प्रकट हुए, कोई भी उनकी थाह नहीं पा सका।

12/9/19

प्रश्न 16: तुम कहते हो कि जो लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, उन्हें परमेश्वर के अंतिम दिनों के न्याय के कार्य को स्वीकार करना चाहिए और उसके बाद ही उनके भ्रष्ट स्वभाव शुद्ध हो सकते हैं और स्वयं वे परमेश्वर द्वारा बचाए जा सकते हैं। परन्तु हम, परमेश्वर की अपेक्षाओं के अनुसार, नम्रता और धैर्य का अभ्यास करते हैं, हमारे दुश्मनों से प्रेम करते हैं, हमारे क्रूसों को उठाते हैं, संसार की चीजों को त्याग देते हैं, और हम परमेश्वर के लिए काम करते हैं और प्रचार करते हैं, इत्यादि। तो क्या ये सभी हमारे बदलाव नहीं हैं? हमने हमेशा इस तरह से चाह की है, तो क्या हम भी शुद्धि तथा स्वर्गारोहण को प्राप्त नहीं कर सकते और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते?

उत्तर:
हम अपने शत्रुओं से प्रेम कर सकते हैं, क्रूस उठा सकते हैं, अपनी देह पर विजय प्राप्‍त कर सकते हैं, और प्रभु के सुसमाचार का प्रसार कर सकते हैं। ये प्रभु में हमारे विश्‍वास के कारण उत्‍पन्‍न होने वाले सकारात्‍मक आचार हैं, और इस प्रकार आचरण करने में समर्थ होने से यह प्रकट होता है कि प्रभु में हमारी आस्था सच्‍ची है।

11/9/19

प्रश्न 15: हम पौलुस के उदाहरण का अनुसरण करते हैं और हम प्रभु के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, सुसमाचार फैलाते हैं और प्रभु के लिए गवाही देते हैं, और पौलुस की तरह प्रभु की कलिसियाओं की चरवाही करते हैं: "मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूँ, मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्‍वास की रखवाली की है" (2 तीमुथियुस 4:7)। क्या यह परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना नहीं है? इस तरह से अभ्यास करने का अर्थ यह होना चाहिए कि हम स्वर्गारोहित होने और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के योग्य हैं, तो हमें स्वर्ग के राज्य में लाये जाने से पहले परमेश्वर के अंतिम दिनों के न्याय और शुद्धि के कार्य को क्यों स्वीकार करना चाहिए?

उत्तर:
यह सवाल बड़ा अहम है। इसमें पूछा गया है कि क्या प्रभु में विश्वास करके किसी को स्वर्ग के राज्‍य तक पहुंचाया जा सकता है। प्रभु में विश्वास करने वाले बहुत से लोग समझते हैं कि प्रभु के लिए मेहनत करने और स्वयं को खपाने वाले पौलुस के मार्ग पर चलना प्रभु के मार्ग पर चलने जैसा ही है, जिससे प्रभु के लौटने पर वे स्वर्ग के राज्‍य में प्रवेश के लायक बन जाएंगे। बहुत से लोगों की यही सोच है। यह सोच क्या प्रभु के वचन पर आधारित है? हमारे ऐसा करने से क्या प्रभु के हृदय को खुशी मिलती है?

6/9/19

प्रश्न 14: हम पौलुस के उदाहरण का अनुसरण करते हैं और हम प्रभु के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, सुसमाचार फैलाते हैं और प्रभु के लिए गवाही देते हैं, और पौलुस की तरह प्रभु की कलिसियाओं की चरवाही करते हैं: "मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूँ, मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्‍वास की रखवाली की है।" क्या यह परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना नहीं है? इस तरह से अभ्यास करने का अर्थ यह होना चाहिए कि हम स्वर्गारोहित होने और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के योग्य हैं, तो हमें स्वर्ग के राज्य में लाये जाने से पहले परमेश्वर के अंतिम दिनों के न्याय और शुद्धि के कार्य को क्यों स्वीकार करना चाहिए?

उत्तर:
आप सबका सवाल बड़ा अहम है। इसमें पूछा गया है कि क्या प्रभु में विश्वास करके किसी को स्वर्ग के राज्‍य तक पहुंचाया जा सकता है। प्रभु में विश्वास करने वाले बहुत से लोग समझते हैं कि प्रभु के लिए मेहनत और खर्च करने वाले पौलुस के मार्ग पर चलना प्रभु के मार्ग पर चलने जैसा ही है, जिससे प्रभु के लौटने पर वे स्वर्ग के राज्‍य में प्रवेश के लायक बन जाएंगे। बहुत से लोगों की यही सोच है। यह सोच क्या प्रभु के वचन पर आधारित है? हमारे ऐसा करने से क्या प्रभु के ह्रदय को खुशी मिलती है?

4/9/19

प्रश्न 13: बाइबल कहती है: "क्योंकि धार्मिकता के लिये मन से विश्‍वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुँह से अंगीकार किया जाता है" (रोमियों 10:10)। हम मानते हैं कि प्रभु यीशु ने हमारे पापों को क्षमा कर दिया है और विश्वास के द्वारा हमें धर्मी बना दिया है। इसके अलावा, हम मानते हैं कि अगर किसी को एक बार बचाया जाता है, तो वे हमेशा के लिए बचा लिए जाते हैं, और जब परमेश्वर वापस आएगा तो हम तुरंत स्वर्गारोहण कर जाएँगे और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करेंगे। तो तुम क्यों प्रमाण दे रहे हो कि बचाए जाने और स्वर्ग के राज्य में लाये जाने से पहले हमें आखिरी दिनों के परमेश्वर के न्याय को स्वीकार करना चाहिए?

उत्तर:
प्रभु के सभी विश्वासियों का मानना है: प्रभु यीशु ने सलीब पर दम तोड़कर हमें मुक्ति दिला दी, तो हम पहले से ही सभी पापों से मुक्त हो चुके हैं। प्रभु अब हमें पापी नहीं मानते। हम अपने विश्वास के ज़रिये धर्मी बन गए हैं। अगर हम अंत तक सहन करते रहे तो हम बचा लिये जाएँगे। जब प्रभु आएँगे तो वे सीधे ही हमें स्वर्ग के राज्य में आरोहित कर देंगे। तो क्या ये वाकई सच है? क्या परमेश्वर ने इस दावे के समर्थन में अपने वचनों में कभी कोई सबूत दिया है? यदि यह दृष्टिकोण सत्य के अनुरूप न हो तो इसके परिणाम क्या होंगे?

2/9/19

प्रश्न 11: तुमने प्रमाण दिया कि परमेश्वर वापस आया है और अंतिम दिनों में परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को करता है। यह प्रकाशित वाक्य में लिखित महान श्वेत सिंहासन के न्याय से अलग लगता है। धर्म में ज्यादातर लोग जो सोचते हैं वो यह है कि महान श्वेत सिंहासन का न्याय उन गैर-विश्वासियों पर लक्षित होता है जो शैतान के लोग होते हैं। जब प्रभु आएगा, तो विश्वासियों को स्वर्ग में उठा लिया जाएगा, और फिर वह गैर-विश्वासियों को नष्ट करने के लिए विपत्ति को भेजेगा। यह महान श्वेत सिंहासन के सामने होने वाला न्याय है। तुम अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय की शुरुआत की गवाही देते हो, लेकिन हमने परमेश्वर को गैर-विश्वासियों को नष्ट करने के लिए विपत्ति लाते हुए नहीं देखा है। तो फिर यह कैसे महान श्वेत सिंहासन का न्याय हो सकता है?

उत्तर:
वे सभी लोग जो वास्तव में बाइबल को समझते हैं जानते हैं कि प्रकाशितवाक्य की किताब में भविष्यवाणी किया गया बड़ा श्‍वेत सिंहासन का न्याय अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य का एक दर्शन है। देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर, भ्रष्ट मानवजाति की शुद्धि करना और उसे बचाना शुरू करते हुए, अंत के दिनों में सत्य को व्यक्त करने और अपना न्याय का कार्य करने के लिए आया। इसका अर्थ है कि बड़े श्वेत सिंहासन का न्याय पहले ही शुरू हो चुका है। न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है।

30/8/19

प्रश्न 10: तुम इसका प्रमाण प्रस्तुत करते हो कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर सत्य को अभिव्यक्त करता है और अंतिम दिनों में न्याय का अपना कार्य करता है। मुझे लगता है कि प्रभु यीशु में हमारा विश्वास और पवित्र आत्मा के कार्य की स्वीकृति का मतलब है कि हमने पहले से ही परमेश्वर के न्याय का अनुभव किया है। सबूत के तौर पर यहाँ प्रभु यीशु के वचन दिए गए हैं: "क्योंकि यदि मैं न जाऊँ तो वह सहायक तुम्हारे पास न आएगा; परन्तु यदि मैं जाऊँगा, तो उसे तुम्हारे पास भेजूँगा। वह आकर संसार को पाप और धार्मिकता और न्याय के विषय में निरुत्तर या कायल करेगा" (योहन 16:7-8)। हमारा मानना है कि, हालांकि प्रभु यीशु का कार्य छुटकारे का कार्य था, जब वह स्वर्ग तक पहुंच गया तो पेन्तेकोस्त के दिन, पवित्र आत्मा उतर आया और उसने मनुष्यों पर काम किया: "पाप और धार्मिकता और न्याय के विषय में निरुत्तर या कायल करेगा"। यह आखिरी दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य होना चाहिए, इसलिए मैं जिस बात का अनुसरण करना चाहता हूँ, वो यह है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा अंतिम दिनों में किए गए न्याय के कार्य और प्रभु यीशु के कार्य के बीच वास्तव में क्या भिन्नताएँ हैं?

 उत्तर:

चूंकि आप सब यह मानते हैं कि प्रभु यीशु ने जो कार्य किया वह छुटकारे का था, और जो मार्ग उन्होंने दिखाया, वह था, "मन फिराओ, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।" तो फिर आप सबने यह कैसे निर्धारित कर लिया कि पवित्र आत्मा पिंतेकुस्त में आया था, अंत के दिनों में न्याय का कार्य करने के लिए? आप सबने प्रभु यीशु के इस वचन को आधार बनाया था, जिसमें कहा गया है, "क्योंकि यदि मैं न जाऊं, तो वह सहायक तुम्हारे पास न आयेगा; परंतु यदि मैं जाऊंगा, तो उसे तुम्हारे पास भेजूंगा। और वह आकर संसार को पाप और धार्मिकता और न्याय के विषय में निरुत्तर कर देगा" (यूहन्ना16:7-8)।

26/8/19

प्रश्न 8: अनुग्रह के युग में, परमेश्वर मानवजाति की पाप-बलि के रूप में सेवा करने के लिए देह बना, और पापों से उन्हें बचा लिया। अंतिम दिनों में परमेश्वर सच्चाई को प्रकट करने और न्याय के अपने कार्य को करने के लिए देह फिर से बन गया है, ताकि मनुष्य को पूरी तरह से शुद्ध किया जा सके और बचाया जा सके। तो मानव जाति को बचाने का कार्य करने के लिए परमेश्वर को दो बार देह-धारण की आवश्यकता क्यों पड़ती है? और परमेश्वर का दो बार देह-धारण करने का वास्तविक महत्व क्या है?

 उत्तर:

ऐसा क्यों है कि परमेश्वर को मानवजाति को बचाने का कार्य करने के लिए दो बार देह धारण करना चाहिये? हमें पहले यह बात स्पष्ट होनी चाहिए: मनुष्य के उद्धार के संबंध में, परमेश्वर के दो देहधारणों का गहरा और अगाध अर्थ है। क्योंकि, चाहे हम छुटकारे की बात करें या फिर अंत के दिनों के न्याय एवं शुद्धिकरण की, उद्धार का कार्य मनुष्य के द्वारा पूरा नहीं किया जा सकता। इसके लिए परमेश्वर का देह धारण करना और अपना कार्य स्वयं पूरा करना आवश्यक है।

5/5/19

5. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य को धार्मिक दुनिया द्वारा अस्वीकार कर दिए जाने का प्रभाव और परिणाम क्या है?

यीशु,अंत के दिनों का न्याय

5. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य को धार्मिक दुनिया द्वारा अस्वीकार कर दिए जाने का प्रभाव और परिणाम क्या है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
समय की प्रत्येक अवधि में, परमेश्वर नया कार्य आरम्भ करेगा, और प्रत्येक अवधि में, मनुष्य के बीच में एक नई शुरुआत होगी। यदि मनुष्य केवल इन सच्चाईयों में ही बना रहता है कि "यहोवा ही परमेश्वर है" और "यीशु ही मसीहा है," जो ऐसी सच्चाईयां हैं जो केवल एक अकेले युग पर ही लागू होती हैं, तो मनुष्य कभी भी पवित्र आत्मा के कार्य के साथ कदम नहीं मिला पाएगा, और वह हमेशा पवित्र आत्मा के कार्य को हासिल करने में असमर्थ रहेगा।

4/5/19

4. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के महत्व को, अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य से प्राप्त परिणामों में, देखा जा सकता है।

अंत के दिनों का न्याय,परमेश्वर का वचन

4. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के महत्व को, अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य से प्राप्त परिणामों में, देखा जा सकता है।


(1) अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय का कार्य मनुष्य को शुद्ध करने, बचाने और सिद्ध बनाने, तथा विजय प्राप्त करने वालों का एक समूह बनाने के लिए किया जाता है।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"तू ने मेरे धीरज के वचन को थामा है, इसलिये मैं भी तुझे परीक्षा के उस समय बचा रखूँगा जो पृथ्वी पर रहनेवालों के परखने के लिये सारे संसार पर आनेवाला है। मैं शीघ्र ही आनेवाला हूँ; जो कुछ तेरे पास है उसे थामे रह कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले। जो जय पाए उसे मैं अपने परमेश्‍वर के मन्दिर में एक खंभा बनाऊँगा, और वह फिर कभी बाहर न निकलेगा; और मैं अपने परमेश्‍वर का नाम और अपने परमेश्‍वर के नगर अर्थात् नये यरूशलेम का नाम, जो मेरे परमेश्‍वर के पास से स्वर्ग पर से उतरनेवाला है, और अपना नया नाम उस पर लिखूँगा" (प्रकाशितवाक्‍य 3:10-12)।

3/5/19

3. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य किस तरह मानवजाति को शुद्ध करता और बचाता है?

3. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य किस तरह मानवजाति को शुद्ध करता और बचाता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता; क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूँ। जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा" (युहन्ना 12:47-48)।
"मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (युहन्ना 16:12-13)।

2/5/19

2. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य महान श्वेत सिंहासन का न्याय है, जिसकी प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में भविष्यवाणी की गई है।

2. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य महान श्वेत सिंहासन का न्याय है, जिसकी प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में भविष्यवाणी की गई है।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए" (1पतरस 4:17)।
"फिर मैं ने एक बड़ा श्‍वेत सिंहासन और उसको, जो उस पर बैठा हुआ है, देखा; उसके सामने से पृथ्वी और आकाश भाग गए, और उनके लिये जगह न मिली। फिर मैं ने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के सामने खड़े हुए देखा, और पुस्तकें खोली गईं; और फिर एक और पुस्तक खोली गई, अर्थात् जीवन की पुस्तक; और जैसा उन पुस्तकों में लिखा हुआ था, वैसे ही उनके कामों के अनुसार मरे हुओं का न्याय किया गया। समुद्र ने उन मरे हुओं को जो उसमें थे दे दिया, और मृत्यु और अधोलोक ने उन मरे हुओं को जो उनमें थे दे दिया; और उन में से हर एक के कामों के अनुसार उनका न्याय किया गया। मृत्यु और अधोलोक आग की झील में डाले गए। यह आग की झील दूसरी मृत्यु है; और जिस किसी का नाम जीवन की पुस्तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की झील में डाला गया।" (प्रकाशितवाक्य 20:11-15)।

1/5/19

1. अनुग्रह के युग में परमेश्वर ने मानव जाति को छुटकारा दिलाया था, तो क्यों आखिरी दिनों में उसे न्याय के अपने कार्य को करने की अब भी आवश्यकता है?

अंत के दिनों का न्याय,यीशु का दूसरा आगमन


1. अनुग्रह के युग में परमेश्वर ने मानव जाति को छुटकारा दिलाया था, तो क्यों आखिरी दिनों में उसे न्याय के अपने कार्य को करने की अब भी आवश्यकता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"इसलिये तुम पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ" (लैव्यव्यवस्था 11:45)।
"सबसे मेल मिलाप रखो, और उस पवित्रता के खोजी हो जिसके बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा" (इब्रानियों 12:14)।
"यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता; क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूँ। जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा" (युहन्ना 12:47-48)।

25/4/19

9. न्याय के कार्य को करने के लिए देह-धारण किया हुआ परमेश्वर किस तरह मानव जाति के अस्पष्ट परमेश्वर में विश्वास को और शैतान के प्रभुत्व के अंधेरे युग को समाप्त करता है?

9. न्याय के कार्य को करने के लिए देह-धारण किया हुआ परमेश्वर किस तरह मानव जाति के अस्पष्ट परमेश्वर में विश्वास को और शैतान के प्रभुत्व के अंधेरे युग को समाप्त करता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि यहोवा के भवन का पर्वत सब पहाड़ों पर दृढ़ किया जाएगा, और सब पहाड़ियों से अधिक ऊँचा किया जाएगा; और हर जाति के लोग धारा के समान उसकी ओर चलेंगे। बहुत से देशों के लोग आएँगे, और आपस में कहेंगे: आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर, याकूब के परमेश्‍वर के भवन में जाएँ; तब वह हमको अपने मार्ग सिखाएगा, और हम उसके पथों पर चलेंगे। क्योंकि यहोवा की व्यवस्था सिय्योन से, और उसका वचन यरूशलेम से निकलेगा। वह जाति जाति का न्याय करेगा, और देश देश के लोगों के झगड़ों को मिटाएगा; और वे अपनी तलवारें पीटकर हल के फाल और अपने भालों को हँसिया बनाएँगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध फिर तलवार न चलाएगी, न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे। हे याकूब के घराने, आ, हम यहोवा के प्रकाश में चलें" (यशायाह 2:2-5)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

20/4/19

4. अंतिम दिनों में अपने न्याय के कार्य को करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, इसके बजाय उसे देह-धारण कर, स्वयं इसे क्यों करना पड़ता है?

परमेश्वर का कार्य,परमेश्वर का वचन


4. अंतिम दिनों में अपने न्याय के कार्य को करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, इसके बजाय उसे देह-धारण कर, स्वयं इसे क्यों करना पड़ता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"जैसा पिता मरे हुओं को उठाता और जिलाता है, वैसा ही पुत्र भी जिन्हें चाहता है उन्हें जिलाता है" (युहन्ना 5:22)।
"वरन् उसे न्याय करने का भी अधिकार दिया है, इसलिये कि वह मनुष्य का पुत्र है" (युहन्ना 5:27)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

2/3/19

2019 Best Hindi Christian Song | स्वभाव में बदलाव पवित्र आत्मा के काम से अलग नहीं हो सकता

2019 Best Hindi Christian Song | स्वभाव में बदलाव पवित्र आत्मा के काम से अलग नहीं हो सकता

पवित्र आत्मा का कार्य और मौजूदगी तय करता है कि तुम खोजते हो निष्ठा से, न कि दूसरों का न्याय तुम पर और न ही उनकी राय से। पर इससे ज़्यादा, क्या पवित्र आत्मा का कार्य समय के साथ तुम्हें बदलकर, परमेश्वर का ज्ञान कराता है, तुम्हारी ईमानदारी को तय करता है। पवित्र आत्मा के कार्य के साथ, तुम सबका स्वभाव बदलेगा, तुम सबकी आस्था पर राय शुद्ध होंगी। परिवर्तन का अर्थ है कि पवित्र आत्मा कार्य पर है, चाहे कितनी भी देर से तुम सबने उसका अनुसरण किया हो।

24/2/19

"स्वप्न से जागृति" क्लिप 2 - बिना पवित्रता के परमेश्वर के राज्य में कोई प्रवेश नहीं करेगा

"स्वप्न से जागृति" क्लिप 2 - बिना पवित्रता के परमेश्वर के राज्य में कोई प्रवेश नहीं करेगा


जब हम प्रभु के विश्वासियों के पाप क्षमा कर दिये जाते हैं, तो क्या हम शुद्धि प्राप्त कर लेते हैं? यदि हम शुद्धि के लिए प्रयास न करें और केवल प्रभु के लिए अपने आप को खपाएं और कर्मठता से प्रभु का कार्य करें तो क्या हम स्वर्ग के राज्य में आरोहित किये जाएंगे? आपको 'स्वप्न से जागृति' फिल्म की क्लिप से सारे उत्तर मिलेंगे!

23/2/19

Hindi Christian Movie | "स्वप्न से जागृति" क्लिप 3

Hindi Christian Movie | "स्वप्न से जागृति" क्लिप 3


अंत के दिनों में परमेश्वर, धरती पर परमेश्वर के भवन से शुरू करके न्याय का कार्य करने के लिये, देहधारण करते हैं, तो अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के न्याय का कार्य मनुष्य को कैसे शुद्ध करता है और बचाता है? सर्वशक्तिमान परमेश्वर के न्याय और ताड़ना का अनुभव लेने के बाद हमारे जीवन स्वभाव में क्या परिवर्तन आएगा? आपको 'स्वप्न से जागृति' फिल्म की क्लिप से सारे उत्तर मिलेंगे!

ईसाई गाने | अनुभव वीडियो "सारी दुनिया तेरी रोशनी की पनाह में आती"

  ईसाई गाने | अनुभव वीडियो "सारी दुनिया तेरी रोशनी की पनाह में आती" (सारी दुनिया की रोशनी) दर्द-ओ-ग़म से कराहती इ...