परमेश्वर की आवाज़ को वास्तव मरण कैसे पहचानना चाहिए? कोई कैसे इस बात की पुष्टि कर सकता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर वास्तव में लौटा हुआ प्रभु यीशु है?
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संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं; मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं" (युहन्ना 10:27)।
"मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (युहन्ना 16:12-13)।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
देहधारी परमेश्वर के वचन एक नया युग आरंभ करते हैं, समस्त मानवजाति का मार्गदर्शन करते हैं, रहस्यों को प्रकट करते हैं, और एक नये युग में मनुष्य को दिशा दिखाते हैं। मनुष्य द्वारा प्राप्त की गई प्रबुद्धता मात्र एक आसान अभ्यास या ज्ञान है। वह समस्त मानवजाति को एक नये युग में मार्गदर्शन नहीं दे सकती है या स्वयं परमेश्वर के रहस्य को प्रकट नहीं कर सकती है। परमेश्वर आखिरकार परमेश्वर है, और मनुष्य मनुष्य ही है। परमेश्वर में परमेश्वर का सार है और मनुष्य में मनुष्य का सार है।
"वचन देह में प्रकट होता है" के लिए प्रस्तावना से
जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर का सार धारण करेगा, और जो देहधारी परमेश्वर है, वह परमेश्वर की अभिव्यक्ति धारण करेगा। चूँकि परमेश्वर देहधारी हुआ, वह उस कार्य को प्रकट करेगा जो उसे अवश्य करना चाहिए, और चूँकि परमेश्वर ने देह धारण किया, तो वह उसे अभिव्यक्त करेगा जो वह है, और मनुष्यों के लिए सत्य को लाने के समर्थ होगा, मनुष्यों को जीवन प्रदान करने, और मनुष्य को मार्ग दिखाने में सक्षम होगा। जिस शरीर में परमेश्वर का सार नहीं है, निश्चित रूप से वह देहधारी परमेश्वर नहीं है; इस बारे में कोई संदेह नहीं है। यह पता लगाने के लिए कि क्या यह देहधारी परमेश्वर है, मनुष्य को इसका निर्धारण उसके द्वारा अभिव्यक्त स्वभाव से और उसके द्वारा बोले वचनों से अवश्य करना चाहिए। कहने का अभिप्राय है, कि वह परमेश्वर का देहधारी शरीर है या नहीं, और यह सही मार्ग है या नहीं, इसे परमेश्वर के सार से तय करना चाहिए। और इसलिए, यह निर्धारित करने[क] में कि यह देहधआरी परमेश्वर का शरीर है या नहीं, बाहरी रूप-रंग के बजाय, उसके सार (उसका कार्य, उसके वचन, उसका स्वभाव और बहुत सी अन्य बातें) पर ध्यान देना ही कुंजी है। यदि मनुष्य केवल उसके बाहरी रूप-रंग को ही देखता है, उसके तत्व की अनदेखी करता है, तो यह मनुष्य की अज्ञानता और उसके अनाड़ीपन को दर्शाता है।
"वचन देह में प्रकट होता है" के लिए प्रस्तावना से
सबसे पहले, वह एक नए युग का मार्ग प्रशस्त करने में समर्थ है; दूसरा, वह मनुष्य का जीवन प्रदान करने और अनुसरण करने का मार्ग मनुष्य को दिखाने में समर्थ है। यह इस बात को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि वह परमेश्वर स्वयं है। कम से कम, जो कार्य वह करता है वह पूरी तरह से परमेश्वर का आत्मा का प्रतिनिधित्व कर सकता है, और ऐसे कार्य से यह देखा जा सकता है कि परमेश्वर का आत्मा उसके भीतर है। चूँकि देहधारी परमेश्वर के द्वारा किया गया कार्य मुख्य रूप से नए युग का सूत्रपात करना, नए कार्य की अगुआई करना और नई परिस्थितियों को पैदा करना था, इसलिए ये कुछ स्थितियाँ अकेले ही यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं कि वह परमेश्वर स्वयं है।
"वचन देह में प्रकट होता है" से "देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर" से
… यह पता करना कठिन नहीं है कि परमेश्वर का अधिकार और पहचान परमेश्वर के कथनों में स्पष्टता से प्रकाशित है। उदाहरण के लिए, जब परमेश्वर ने कहा "मेरी वाचा तेरे साथ बनी रहेगी, इसलिए तू … मैं ने तुझे ठहरा दिया … मैं तुझे बनाऊँगा" जैसे वाक्यांश "तू बनेगा" और "मैं करूँगा," जिसके वचन परमेश्वर की पहचान और अधिकार के दृढ़ निश्चय को लिए हुए हैं, और एक मायने में, सृष्टिकर्ता की विश्वासयोग्यता का संकेत है; दूसरे मायने में, वे परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल किए गए विशिष्ट वचन हैं, जिनमें सृष्टिकर्ता की पहचान है—साथ ही साथ रूढ़िगत शब्दावली का एक भाग भी है। ...
इन वचनों को परमेश्वर के मुँह से कहा गया था, और परमेश्वर के वचनों में सामर्थ, प्रताप, और अधिकार है। ऐसी शक्ति और अधिकार को, और प्रमाणित तथ्यों की पूर्णता की अनिवार्यता को, किसी भी सृजे गए प्राणी और न सृजे गए प्राणी द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता है, और न ही कोई सृजा प्राणी और न अनसृजा प्राणी उससे बढ़कर उत्कृष्ट हो सकता है। केवल सृष्टिकर्ता ही मानवजाति के साथ ऐसे अन्दाज़ और ऊँची और नीची आवाज़ में बात कर सकता है, और प्रमाणित तथ्यों ने साबित किया है कि उसकी प्रतिज्ञाएँ खोखले शब्द, या बेकार की घमण्ड की बातें नहीं हैं, परन्तु अद्वितीय अधिकार का प्रदर्शन हैं जिस से कोई व्यक्ति, वस्तु या पदार्थ बढ़कर नहीं हो सकता है।
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