- मसीही भजन - सृष्टिकर्त्ता की सच्ची भावनाएँ मानवता के लिये
- Ⅰ
- सृष्टिकर्त्ता हर वक्त बीच है इंसान के।
- वो हर वक्त बात करता है,
- इंसान और सृष्टि से।
- हर रोज़ नया काम कर रहा है वो।
- उसका स्वभाव और सार व्यक्त होते हैं,
- व्यक्त होते हैं इंसान के साथ उसके संवाद में।
- उसके विचार और ख़्याल प्रकट होते हैं पूरी तरह से।
- हाँ, दिखाई देते हैं,
- वो उसके काम में पूरी तरह से।
- नज़र रखता है,
- साथ रहता है वो हर पल इंसान के,
- अपने ख़ामोश वचनों से वो बात करता है
- इंसान से और पूरी सृष्टि से।
- स्वर्ग में है परमेश्वर अपनी सृष्टि के बीच।
- इंतज़ार करता और नज़र रखता है वो।
- साथ तुम्हारे है वो।
- हाथ स्नेही हैं उसके और सशक्त हैं।
- हल्के हैं उसके कदम।
- मनोहारी और कोमल है उसकी आवाज़,
- उसका रूप पास से गुज़रता है और मुड़ता है,
- आगोश में लेता है पूरी इंसानियत को।
- सुंदर और सौम्य है उसका चेहरा।
- उसने न कभी छोड़ा है,
- ओझल कभी न हुआ है।
- दिन-रात साथ है इंसान के वो।
- सतत साथी है इंसान का वो।
- Ⅱ
- समर्पित परवाह, विशेष अनुराग अपना
- जो प्रदर्शित करता है वो इंसान के लिये,
- अपनी सच्ची चिंता और प्यार इंसान के लिये,
- वो सब रोशनी में आए धीरे-धीरे
- नीनवे शहर को जब बचाया उसने।
- ख़ासकर, यहोवा और योना के संवाद ने,
- ज़ाहिर कर दी करुणा की सीमा सृष्टिकर्ता की,
- जो वो महसूस करता है अपने रचे इंसान के लिये।
- उनके संवाद से जानोगे तुम सच्ची भावनाएँ
- परमेश्वर की इंसान के लिये।
- स्वर्ग में है परमेश्वर अपनी सृष्टि के बीच।
- इंतज़ार करता और नज़र रखता है वो।
- साथ तुम्हारे है वो।
- हाथ स्नेही हैं उसके और सशक्त हैं।
- हल्के हैं उसके कदम।
- मनोहारी और कोमल है उसकी आवाज़,
- उसका रूप पास से गुज़रता है और मुड़ता है,
- आगोश में लेता है पूरी इंसानियत को।
- सुंदर और सौम्य है उसका चेहरा।
- उसने न कभी छोड़ा है,
- ओझल कभी न हुआ है।
- दिन-रात साथ है इंसान के वो।
- सतत साथी है इंसान का वो।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- परमेश्वर के भजन - चुने हुए भजनों को सूची - परमेश्वर प्रेम को ब्यक्त करना
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