अपने पूरे जीवन में, मैं हमेशा स्वयं को तन और मन से पूरी तरह से, परमेश्वर को समर्पित करने के लिए तैयार हूँ। इस तरह, मेरे अंतःकरण पर कोई दोष नहीं है और मैं थोड़ी शांति प्राप्त कर सकता हूँ। एक व्यक्ति जो जीवन की खोज करता है, उसे सबसे पहले अपना हृदय पूरी तरह से परमेश्वर को समर्पित कर देना चाहिए। यह एक पूर्व शर्त है।
इस बात का निरीक्षण करना कि क्या तुम जो कुछ भी करते हैं उसमें धार्मिकता का अभ्यास करते हैं, और क्या तुम्हारी समस्त क्रियाओं की परमेश्वर द्वारा निगरानी की जाती है, ये परमेश्वर में विश्वास करनेवालों के स्वभावजन्य सिद्धांत हैं।
मनुष्य, शैतान के प्रभाव से मुक्ति के बिना बेड़ी में बँधा हुआ, अंधकार के प्रभाव के आवरण में रह रहा है।और मनुष्य का स्वभाव, शैतान के द्वारा परिवर्तित होकर, तेज़ी से भ्रष्ट होता जा रहा है।
तुम्हारे हृदय में एक बहुत बड़ा रहस्य है। तुम कभी नहीं जान पाते कि वो वहाँ है क्योंकि तुम एक ऐसे संसार में जीवन बिता रहे हो जहां चमकती रोशनी नहीं है। तुम्हारा हृदय और तुम्हारी आत्मा दुष्ट शक्ति द्वारा दबोच ली गई है। तुम्हारी आंखों को अंधकार ने ढक लिया है, तुम सूर्य को आकाश में नहीं देख सकते, न ही रात में टिमटिमाते तारों को। तुम्हारे कान धोखा देने वाले शब्दों से जाम हो गए हैं और तुम यहोवा की गर्जन वाली आवाज को सुन नहीं पाते हो, न ही सिंहासन से तेज बहते जल की आवाज को। जो जो तुम्हारा था और सर्वशक्तिमान ने जो तुम्हें दिया था सब कुछ तुमने खो दिया है। तुम कड़वाहट के एक अथाह सागर में प्रवेश कर चुके हो, जहां बच पाने का सामर्थ नहीं है, जीवित बचने की आशा नहीं है, बस संघर्ष और हलचल मचाने के लिये बचे हुए हो... उस घड़ी से लेकर तुम बुरी शक्ति के द्वारा यातना सहने के लिए विनाश की नियति में हो, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की आशीषों से बहुत दूरी पर हो, सर्वशक्तिमान की पूर्वयोजनाओं से भी दूर, और तुम लौट न पाने वाली सड़क पर भटक रहे हो। लाखों पुकार न तुम्हारे हृदय को और न तुम्हारी आत्मा को जगा पाएंगी।। तुम दुष्ट शक्ति की बाहों में गहरी नींद लेते हो, जिसने तुम्हें काल्पनिक संसार में बिना किसी दिशा के और बिना किसी स्पष्ट सड़क के, ललचाकर खींच लिया है। अब यहीं से तुमने अपनी मूल पवित्रता को, मासूमियत को खो दिया है, और सर्वशक्तिमान की देखभाल से छिपने लगे हो। वह दुष्ट शक्ति तुम्हारे हृदय को चलाती है और तुम्हारा जीवन बन जाती है। अब तुम उससे डरते नहीं हो, उसे नजरअंदाज नहीं करते, उस पर संदेह नहीं करते। बल्कि उसे तो तुम अपने हृदय का ईश्वर समझने लगते हो। वह तुम्हारे मन की मूरत बन जाता है, उसकी आराधना करते हो, उसकी परछाई समान सदैव साथ रहते हो, और पारस्परिक रूप से जीवन और मृत्यु में एक दूसरे के लिए वचनबद्ध हो जाते हो।
पृथ्वी पर मेरे अनुयायी होने के लिए मैंने कई लोगों को खोजा है। उनमें ऐसे लोग हैं जो याजकों की तरह सेवा करते हैं, जो अगुआई करते हैं, जो बेटे बनते हैं, जो लोगों का गठन करते हैं और जो सेवा करते हैं।
अपने जीवनकाल में कोई भी व्यक्ति नहीं जानता है कि वह किस तरह की बाधाओं का सामना करने जा रहा है, न ही उसे पता होता है कि वह किस प्रकार के शुद्धिकरण के अधीन होगा।
परमेश्वर के कार्य और वचन का अभिप्राय आप लोगों के स्वभाव में एक परिवर्तन लाना है; उनका उद्देश्य मात्र यह नहीं है कि आप लोग उन्हें समझें या पहचानें और उन्हें अंत तक रखे रहें।
इस बात का निरीक्षण करना कि क्या तुम जो कुछ भी करते हैं उसमें धार्मिकता का अभ्यास करते हैं, और क्या तुम्हारी समस्त क्रियाओं की परमेश्वर द्वारा निगरानी की जाती है, ये परमेश्वर में विश्वास करनेवालों के स्वभावजन्य सिद्धांत हैं।
हर व्यक्ति को परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जाने की संभावना है, इसलिए सभी को समझना चाहिए कि परमेश्वर की कौन सी सेवा सबसे ज्यादा परमेश्वर के प्रयोजनों के अनुरूप है।
वो क्या है जो मनुष्य ने प्राप्त किया है जब उसने सर्वप्रथम परमेश्वर में विश्वास किया? आपने परमेश्वर के बारे में क्या जाना है? परमेश्वर में अपने विश्वास के कारण आप कितने बदले हैं?
तहेदिल से परमेश्वर की आत्मा को स्पर्श करके लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, उससे प्रेम करते हैं, और उसे संतुष्ट करते हैं, और इस प्रकार वे परमेश्वर की संतुष्टि प्राप्त करते हैं;